इस्लाम > Hi > हदीस > फकह तथ उसल ए फकह > लोगों को आदेश दिया गया है कि उनका अंतिम कार्य काबा का तवाफ़ हो। हाँ, मगर माहवारी के दिनों …
सह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयعن عبد الله بن عبَّاس رضي الله عنهما قال: «أُمِرَ الناس أن يكون آخر عَهْدِهِمْ بالبيت، إلا أنه خُفِّفَ عن المرأة الحائض».
पवित्र काबा बड़ा सम्मानित घर है। वह अल्लाह की इबादत और उसके सामने विनयपूर्वक खड़े होने का निशान है। लोगों के दिलों में उसका आदर, उससे संबंध और प्रेम रख दिया गया है।
यही कारण है कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने हज करने वाले को आदेश दिया कि वापसी से पहले उसका आख़िरी कार्य काबा का तवाफ़ हो। इस अंतिम तवाफ़ को 'तवाफ़-ए-वदा' कहा जाता है। अलबत्ता, माहवारी वाली स्त्री को तवाफ़ भी नहीं करना है और फ़िदया भी नहीं देना है; क्योंकि उसके प्रवेश करने से मस्जिद गंदी हो सकती है। लेकिन यह हदीस हज के बारे में है। इसमें उमरा शामिल नहीं है।
श्रेणियाँ : इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह · हज तथा उमरा · अल्लाह की ओर बुलाना · इस्लाम की विशिष्टता तथा गुण · फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह · हज का तरीक़ा · आह्वान एवं भलाई का आदेश देने तथा बुराई से रोकने का प्रबंध करना