धर्म आसान एवं सरल है और धर्म के मामले में जो भी उग्रता दिखाएगा, वह परास्त होगा। अतः, बीच क…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है

स़ह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: धर्म आसान एवं सरल है और धर्म के मामले में जो भी उग्रता…

हदीस की व्याख्या: धर्म आसान एवं सरल है और धर्म के मामले में जो भी उग्रता…

नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने बयान फ़रमाया कि इस्लाम धर्म अपने सभी मामलों में आसानी और सरलता पर आधारित है। और यह आसानी उस समय और भी पुख्ता हो जाती है जब कमजोरी (असमर्थता) और ज़रूरत का कोई कारण मौजूद हो। और क्योंकि धार्मिक कार्यों में गहराई (बहुत सख्ती) अपनाने और नरमी छोड़ देने का परिणाम असमर्थता और पूरे काम या उसके कुछ हिस्से से रुक जाना है। उसके बाद अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने संतुलित रहने की प्रेरणा दी है। बंदा शरई आदेशों के अनुपालन में न तो कोताही से काम ले और न अपने ऊपर ऐसी चीज़ें लादे, जिन्हें उठाने की शक्ति न रखता हो। अगर संपूर्णतम पर अमल न कर सके, तो उसके निकटतम पर अमल करे।

उसके बाद अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने ऐसे व्यक्ति को बड़े प्रतिफल का सुसमाचार सुनाया है, जो संपूर्णतम पर अमल न कर पाने के कारण थोड़ा-सा अमल ही करता हो, उसमें निरंतरता रखता हो। क्योंकि जब विवशता में बंदे का कोई हाथ न हो, तो उससे प्रतिफल में कमी नहीं होती।

फिर चूँकि दुनिया यात्रा का स्थान है और यहीं से आख़िरत का मार्ग तय होता है, इसलिए अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने चुस्ती के तीन समयों में निरंतरता के साथ इबादत द्वारा सहयोग प्राप्त करने का आदेश दिया है। ये तीन समय इस प्रकार हैं :

1- दिन के पहले भाग में चलना। दिन के पहले भाग में चलने से मुराद फ़ज्र की नमाज़ से लेकर सूरज निकलने के बीच का समय है।

2- सूरज ढलने के बाद चलना।

3- पूरी रात या रात के कुछ भाग में चलना। चूँकि रात में काम करना दिन में काम करने की तुलना में कहीं अधिक कठिन होता है, इसलिए "रात के कुछ भाग में" कहकर उसके कुछ भाग में काम करने का आदेश दिया है।

सीख: धर्म आसान एवं सरल है और धर्म के मामले में जो भी उग्रता…

श्रेणियाँ : अल्लाह की ओर बुलाना · इस्लाम की विशिष्टता तथा गुण · आह्वान एवं भलाई का आदेश देने तथा बुराई से रोकने का प्रबंध करना

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لا إله إلا الله अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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