इस्लाम > Hi > हदीस > फकह तथ उसल ए फकह > कोई भी व्यक्ति गुस्से की हालत में दो व्यक्तियों के बीच निर्णय नहीं करेगा
सह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयعن عبد الرحمن بن أبي بكرة قال: «كتب أبي -أو كتبتُ له- إلى ابنه عبيد الله بن أبي بَكْرَةَ وَهُوَ قَاضٍ بِسِجِسْتَانَ: أَنْ لا تَحْكُمْ بَيْنَ اثْنَيْنِ وأنت غضبان، فإني سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: لايحكم أحد بين اثنين وهو غضبان».
وَفِي رِوَايَةٍ: «لا يَقْضِيَنَّ حَكَمٌ بين اثْنَيْنِ وهو غَضْبَانُ».
प्रबुद्ध विधी बनाने वाले ने निर्णय करने वाले को क्रोध की अवस्था में लोगों के बीच निर्णय करने से मना किया है। इसलिए कि क्रोध इनसान की व्यक्तिगत संतुलन को प्रभावित करता है और इस बात की संभावना रहती है कि वह क्रोधावस्था में अत्याचार कर बैठे या ग़लत निर्णय दे डाले, जो प्रतिवादी पर ज़ुल्म हो तथा निर्णय करने वाले के लिए खेद एवं गुनाह का कारण।
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