मैं तुमसे क़सम इसलिए नहीं ले रहा हूँ कि तुमपर कोई आरोप लगाना चाहता हूँ। दरअसल बात यह है कि…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है

स़ह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: मैं तुमसे क़सम इसलिए नहीं ले रहा हूँ कि तुमपर कोई आरोप…

عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ قَالَ: خَرَجَ مُعَاوِيَةُ عَلَى حَلْقَةٍ فِي الْمَسْجِدِ، فَقَالَ: مَا أَجْلَسَكُمْ؟ قَالُوا: جَلَسْنَا نَذْكُرُ اللهَ، قَالَ آللَّهِ مَا أَجْلَسَكُمْ إِلَّا ذَاكَ؟ قَالُوا: وَاللهِ مَا أَجْلَسَنَا إِلَّا ذَاكَ، قَالَ: أَمَا إِنِّي لَمْ أَسْتَحْلِفْكُمْ تُهْمَةً لَكُمْ، وَمَا كَانَ أَحَدٌ بِمَنْزِلَتِي مِنْ رَسُولِ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَقَلَّ عَنْهُ حَدِيثًا مِنِّي: وَإِنَّ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَرَجَ عَلَى حَلْقَةٍ مِنْ أَصْحَابِهِ، فَقَالَ: «مَا أَجْلَسَكُمْ؟» قَالُوا: جَلَسْنَا نَذْكُرُ اللهَ وَنَحْمَدُهُ عَلَى مَا هَدَانَا لِلْإِسْلَامِ، وَمَنَّ بِهِ عَلَيْنَا، قَالَ: «آللَّهِ مَا أَجْلَسَكُمْ إِلَّا ذَاكَ؟» قَالُوا: وَاللهِ مَا أَجْلَسَنَا إِلَّا ذَاكَ، قَالَ: «أَمَا إِنِّي لَمْ أَسْتَحْلِفْكُمْ تُهْمَةً لَكُمْ، وَلَكِنَّهُ أَتَانِي جِبْرِيلُ فَأَخْبَرَنِي أَنَّ اللهَ عَزَّ وَجَلَّ يُبَاهِي بِكُمُ الْمَلَائِكَةَ».

हदीस की व्याख्या: मैं तुमसे क़सम इसलिए नहीं ले रहा हूँ कि तुमपर कोई आरोप…

मुआविया बिन अबू सुफ़यान रज़ियल्लाहु अनहुमा मस्जिद में मौजूद लोगों की एक सभा के पास पहुँचे और सभा में मौजूद लोगों से पूछा कि वह किस उद्देश्य से बैठे हुए हैं? लोगों ने जवाब दिया : हम अल्लाह का ज़िक्र करने के लिए बैठे हुए हैं। तब उन्होंने उनको क़सम खाने को कहा कि क्या वाक़ई उनके बैठने और एकत्र होने का उद्देश्य अल्लाह के ज़िक्र के सिवा कुछ और नहीं है? जब उन्होंने क़सम खा ली, तो फ़रमाया : मैंने तुम लोगों को क़सम खाने को इसलिए नहीं कहा कि मैं तुम्हें झूठा समझता हूँ और तुम्हारे सच्चे होने में मुझे संदेह है। फिर उन्होंने बताया कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के यहाँ उनको क्या स्थान प्राप्त था। बताया कि उनको आपसे जो निकटता प्राप्त थी, वह किसी और को नहीं थी। क्योंकि उनकी बहन उम्म-ए-हबीबा रज़ियल्लाहु अनहा अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की पत्नी थीं और खुद वह वह्य लिखने वाले सहाबा में शामिल थे। इसके बावजूद उन्होंने आपसे बहुत कम हदीसें नक़ल की हैं। फिर उन्होंने बताया कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम एक दिन घर से निकले, तो देखा कि कुछ सहाबा मस्जिद में बैठकर अल्लाह का ज़िक्र और इस्लाम की राह दिखाने पर उसकी प्रशंसा कर रहे हैं। तब आपने उनसे बैठने का उद्देश्य पूछा और क़सम भी खाने को कहा, जैसा कि मुआविया रज़ियल्लाहु अनहु ने किया था। फिर आपने अपने साथियों को बैठने का सबब पूछने और क़सम खाने को कहने का कारण भी बता दिया। बताया कि आपके पास जिबरील अलैहिस्सलाम आए थे और बता रहे थे कि अल्लाह फ़रिश्तों के सामने उनपर अभिमान एव फ़ख़्र कर रहा है, उनकी फ़ज़ीलत बता रहा है, उनकी प्रशंसा कर रहा है और फ़रिश्तों को उनका अच्छा अमल दिखा रहा है।

सीख: मैं तुमसे क़सम इसलिए नहीं ले रहा हूँ कि तुमपर कोई आरोप…

श्रेणियाँ : फ़ज़ीलतें · ज्ञान तथा विद्या की फ़ज़ीलत · ज़िक्र की फ़ज़ीलतें · फ़ज़ीलतें तथा आदाब

بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
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13 दिनों में अमावस्या
أستغفر الله मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद