इस्लाम > Hi > हदीस > फजलत तथ आदब > अल्लाह ने अपने नबी को आवाज़ को सुरीली बनाने की जिस प्रकार अनुमति दी है किसी और वस्तु की नह…
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27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयعن أبي هريرة رضي الله عنه عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «ما أذنَ الله لشيء ما أَذِنَ لنبي حسن الصوت يَتَغَنَّى بالقرآن يجهر به».
इस हदीस में नमाज़ के अंदर तथा नमाज़ के बाहर अच्छी आवाज़ में क़ुरआन पढ़ने की प्रेरणा दी गई है। इन्सान को चाहिए कि जब क़ुरआन पढ़े, तो ध्वनि के साथ، अच्छी आवाज़ में, दर्द से भरी हुई लय के साथ, अन्य वाणियों की इच्छा से मुक्त होकर, उसके द्वारा अंतरात्मा की बेनियाज़ी तलब करते हुए और भौतिक बेनियाज़ी की आशा रखते हुए उसे पढ़े। ज्ञात हो कि इस हदीस में क़ुरआन को सुरीली आवाज़ में पढ़ने से मुराद उसे सुंदर आवाज़ में पढ़ना है, इस तरह पढ़ना नहीं कि संगीत वाले गानों की धुन पर आधारित जान पड़ता हो।
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