“जो मुसलिम शासक के आज्ञापालन से इनकार करे और (मुसलमानों की) जमात से निकल जाए, फिर उसकी मृत…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है

स़ह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: “जो मुसलिम शासक के आज्ञापालन से इनकार करे और (मुसलमानों…

हदीस की व्याख्या: “जो मुसलिम शासक के आज्ञापालन से इनकार करे और (मुसलमानों…

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि जो व्यक्ति शासकों के अनुसरण के दायरे से बाहर निकल गया और शासक के हाथ पर एकमत होकर बैअत करने वाली मुसलमानों की जमात को छोड़कर अलग हो गया तथा इसी अलगाव की अवस्था में मर गया, वह जाहिलियत की मौत मरा, जो न किसी अमीर का अनुसरण करते थे और न किसी एक जमात से जुड़े रहते थे। अलग-अलग टोलियों में बटकर एक-दूसरे से युद्ध किया करते थे।

आपने आगे बताया है कि जिसने किसी ऐसे झंडे के नीचे युद्ध किया, जिसके बारे में यह स्पष्ट न हो कि उसे सत्य के लिए उठाया गया है या असत्य के लिए, वह दीन या सत्य की बजाय अपने समुदाय या अपने क़बीले के प्रति पक्षपातपूर्ण रवय्या के कारण क्रोध में आता हो और इसी पक्षपात को चरितार्थ करने के लिए युद्ध करता हो, ऐसा व्यक्ति जब इसी हालत में मारा जाए, तो उसका मारा जाना जाहिलियत के मारे जाने की तरह होगा।

इसी तरह जो व्यक्ति अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की उम्मत से बग़ावत (विद्रोह) कर बैठे, उसके अच्छे और बुरे हर आदमी की गर्दन उड़ाने लगे, वह अपने इन ग़लत कामों की कोई परवाह न करता हो और उनके अंजाम से डरता न हो, ग़ैर-मुस्लिमों तथा शासकों को दिए गए वचनों का पालन करने की बजाय खुले आम उनका उल्लंघन करता हो, तो यह कबीरा (बड़ा) गुनाह है और ऐसा करने वाला इस बड़ी सख़्त चेतावनी का हक़दार है।

सीख: “जो मुसलिम शासक के आज्ञापालन से इनकार करे और (मुसलमानों…

श्रेणियाँ : शरई राजनीति · इमाम (शासनाध्यक्ष) के विरुद्ध विद्रोह · आह्वान एवं भलाई का आदेश देने तथा बुराई से रोकने का प्रबंध करना

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حسبنا الله ونعم الوكيل अल्लाह हमारे लिए काफी है, कितना अच्छा रक्षक है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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