इस्लाम > Hi > हदीस > फकह तथ उसल ए फकह > कोई अपने भाई को ऐसे दांत से काटता है, जैसे साँड़ काटता है। तेरे लिए कोई दियत नहीं है।
सह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयعن عمران بن حصين رضي الله عنهما «أن رجلا عَضَّ يَدَ رجل؛ فَنَزَعَ يَدَهُ من فِيهِ؛ فوقعت ثَنِيَّتُهُ؛ فاختصما إلى النبي صلى الله عليه وسلم فقال: يَعَضُّ أحدُكم أخاه كما يَعَضُّ الفَحْلُ؛ لا دِيَةَ لك».
एक आदमी ने दूसरे आदमी पर अत्याचार करते हुए उसका हाथ दाँतों से काट लिया, जब उस ने हाथ काटने वाले के मुख से जोर से हाथ निकाला तो उसके सामने के दो दाँत गिर गए, चुनांचे दोनों मामला लेकर नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आए। काटने वाला अपने गिरे हुए दोनों दाँतों का क़िसास माँग रहा था और दुसरा व्यक्ति बचाव करते हुए कह रहा था कि वह अपना हाथ बचाना चाहता था। अतः नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने काटने वाले को डाँटते हुए फ़रमायाः कैसे कोई वह कार्य करता है, जो कार्य बड़े भारी भरकम जानवर करते हैं? और फ़रमायाः तुम में से कुछ लोग अपने भाई का हाथ चिबा जाते हैं फिर जुर्म करने वाले दाँतों की दियत माँगने आते हैं? तुम्हारी कोई दियत नहीं, क्योंकि आरंभ करने वाला ही अत्याचारी है।
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