इस्लाम > Hi > हदीस > फकह तथ उसल ए फकह > निश्चय यह निशानियाँ, जिन्हें अल्लाह भेजता है, किसी के मरने या जीने से सामने नहीं आतीं। बल्…
सह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयعن أبي موسى الأشعري رضي الله عنه قال: خَسَفَت الشمس على زمان رسول الله صلى الله عليه وسلم . فقام فَزِعًا، ويخشى أن تكون الساعة، حتى أتى المسجد، فقام، فصلى بأطول قيام وسجود، ما رأيته يفعله في صلاته قطُّ، ثم قال: إن هذه الآيات التي يُرْسِلُهَا الله عز وجل : لا تكون لموت أحد ولا لحياته، ولكن الله يُرْسِلُهَا يُخَوِّفُ بها عباده، فإذا رأيتم منها شيئا فَافْزَعُوا إلى ذكر الله و دُعَائِهِ وَاسْتِغْفَارِهِ.
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के काल में जब सूर्य ग्रहण हुआ, तो घबराए हुए खड़े हुए क्योंकि आपकी अपने रब से पूर्ण आगाही यह अनिवार्य करती थी कि आप इनसानों की गुमराही एवं सरकशी के कारण अल्लाह से हद दरजा भयभीत रहें। भयभीत होने का एक कारण यह भी था कि शायद सूर में फूँक मारने का समय निकट आ गया हो। अतः आप मस्जिद गए और लोगों को सूर्य ग्रहण की नमाज़ पढ़ाई। तौबा और क्षमा याचना के इज़हार के लिए इतनी लंबी नमाज़ पढ़ी कि जो पहले देखी नहीं गई थी। फिर जब अपने रब से मुनाजात और फ़रियाद से फ़ारिग़ हो गए, तो लोगों की ओर मुतवज्जे हुए और उन्हें नसीहत की तथा यह स्पष्ट कर दिया कि इन निशानियों को अल्लाह, अपने बंदों की शिक्षा, याद दिहानी और चेतावनी के तौर पर भेजता है, ताकि लोग दुआ, क्षमा याचना और नमाज़ में जुट जाएँ।
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