दुआओं तथा अज़कार पर आधारित फ़िक़्ह पर हदीसें

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«दुआओं तथा अज़कार पर आधारित फ़िक़्ह» पर 112 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

दुआओं तथा अज़कार पर आधारित फ़िक़्ह पर हदीसों की सूची

इसकी सनद सह़ीह़ है। तुम्हारे यहाँ रोज़ेदार इफ़तार किया करें, तुम्हारा खाना नेक लोग खाएँ और फ़रिश्ते तुम्हारे लिए दुआ करें सह़ीह़ ऐ मेरे रब! मेरी सहायता कर और मेरे विरुद्ध सहायता न कर, मुझे विजय प्रदान कर और किसी को मेरे विरुद्ध विजय प्रदान न कर, मेरे हक़ में योजना बना तथा मेरे व सह़ीह़ इन शौच के स्थानों में शैतान तथा जिन्न उपस्थित रहते हैं, अतः, जब तुममें से कोई शौच के स्थान में आए, तो कहे: मैं नापाक जिन्नों और नापाक जिन्नियों से अल् सह़ीह़ जिसने कहा: أستغفر الله الذي لا إله إلا هو الحي القيوم وأتوب إليه 'मैं अल्लाह से क्षमा माँगता हूँ, जिसके सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं, वह जीवित है, सारी का सह़ीह़ नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक मास तक रुकू के बाद क़ुनूत (नाज़िला) पढ़ा, (इस में) आप बनू सुलैम के कुछ क़बीलों- पर बद्दुआ करते थे। सह़ीह़ दोनों ने सच कहा है। इन लोगों को ऐसा अज़ाब दिया जाता है कि सारे चौपाए उसे सुनते हैं। सह़ीह़ "ऐ अल्लाह! मेरे दिल में नूर रख दे, मेरी आँख में नूर रख दे, मेरे कान में नूर रख दे, मेरे दाएँ नूर रख दे, मेरे बाएँ नूर रख दे, मेरे ऊपर नूर रख दे, मेरे स़ह़ीह़ लि-ग़ैरिही (अन्य सनदों अथवा रिवायतों से मिलकर स़ह़ीह़) ऐ अब्बास, ऐ अल्लाह के रसूल के चचा, अल्लाह से दुनिया एवं आख़िरत में आफ़ियत (सलामती) माँगिए। सह़ीह़ अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) शाम के समय यह दुआ पढ़तेः "أمسينا وأمسى الملك لله، والحمد لله، لا إله إلا الله وحده لا شريك له स़ह़ीह़ जब आदमी अपने घर में प्रवेश करता है और प्रवेश करते समय एवं खाना खाते समय अल्लाह का नाम लेता है, तो शैतान अपने साथियों से कहता है : यहाँ न तुम्हारे लिए स़ह़ीह़ “ऐ अल्लाह! मैंने अपने आपको तेरे सामने समर्पित कर दिया, तुझपर ईमान लाया, तुझपर भरोसा किया, तेरी ओर लौटा और तेरी मदद से दुश्मनों से झगड़ा किया। ऐ अल्लाह सह़ीह़ निश्चय यह निशानियाँ, जिन्हें अल्लाह भेजता है, किसी के मरने या जीने से सामने नहीं आतीं। बल्कि उन्हें वह अपने बंदों को डराने के लिए भेजता है। अतः जब उनम स़ह़ीह़ अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अक्सर यह दुआ पढ़ा करते थे : "يَا مُقَلِّبَ القُلُوبِ ثَبِّتْ قَلْبِي عَلَى دِينِكَ" (ऐ दिलों को पलटने वाले, मेर सह़ीह़ यह दुआ सदा पढ़ते रहा करो 'يَاذا الجَلاَلِ والإكْرامِ' (अर्थात, ऐ प्रतापी एवं उपकारी)। सह़ीह़ तुम अपने लिए बददुआ न करो, अपनी संतान के लिए बददुआ न करो तथा अपनी धन-दौलत के लिए दुष्कामना न करो। कहीं ऐसा न हो कि तुम अल्लाह की ओर से उस घड़ी को पा लो सह़ीह़ तुममें से किसी की दुआ उस समय तक क़बूल होती है, जब तक वह जल्दबाजी न करे। अर्थात ऐसा न कहे कि मैंने अपने रब को पुकारा, परन्तु, मेरी दुआ क़बूल नहीं हुई। स़ह़ीह़ अल्लाह अपने बंदे से सबसे निकट रात के अंतिम भाग में होता है। ह़सन ग़रीब एक व्यक्ति अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आकर बोला कि ऐ अल्लाह के रसूल! मैं यात्रा पर निकलना चाहता हूँ। अतः, मुझे कुछ पाथेय प्रदान की सह़ीह़ जिसने ( घर से निकलते समय) कहाः 'بِسم الله تَوَكَّلتُ على اللهِ، وَلاَ حول ولا قُوَّة إِلَّا بالله' (अर्थात, अल्लाह के नाम से, मैंने अल्लाह पर भरोसा कि ह़सन सबसे उत्तम ज़िक्र 'ला इलाहा इल्लल्लाह' और सबसे उत्तम दुआ 'अल-हम्दु लिल्लाह' है। स़ह़ीह़ मुझे एक ऐसा वाक्य मालूम है कि अगर यह व्यक्ति उसे पढ़ ले, तो इसका ग़ुस्सा ठंडा हो जाए। अगर इसने कहा : मैं शैतान से अल्लाह की शरण में आता हूँ। तो इसका ग स़ह़ीह़ ऐ अल्लाह! मैं तुझसे मार्गदर्शन, धर्मनिष्ठा, पवित्राचार और बेनियाज़ी (निस्पृहता) माँगता हूँ। सह़ीह़ ऐ अल्लाह, मैंने तेरे लिए इस्लाम ग्रहण किया, तुझपर ईमान लाया, तुझपर भरोसा किया, तेरी ओर लौटा और तेरी सहायता से बहस की। ऐ अल्लाह, तेरे सिवा कोई सत्य पूज सह़ीह़ रात में एक समय होता है कि जो मुसलमान उसमें अल्लाह से दुनिया एवं आख़िरत से संबंधित कोई भलाई माँगता हुआ पाया जाएगा, अल्लाह उसे ज़रूर प्रदान करेगा। यह घड स़ह़ीह़ मैं अपने बारे में अपने बंदे की सोच के निकट होता हूँ तथा मैं उसके साथ होता हूँ, वह जब भी मुझे याद करे। स़ह़ीह़ शैतान तुममें से हर व्यक्ति के सर के पीछ रात में सोते समय तीन गाँठ लगा देता है और हर गाँठ पर यह कहकर फूँक मारता है कि सो जा, अभी रात बहुत बाक़ी है। सह़ीह़ क्या तुममें से कोई इस बात से विवश है कि प्रत्येक दिन एक हज़ार नेकियाँ प्राप्त करे? आपके पास बैठे लोगों में से एक व्यक्ति ने पूछाः आदमी एक हज़ार नेकिया स़ह़ीह़ उस व्यक्ति की मिसाल जो अपने रब को याद करता है और उसकी मिसाल जो अपने रब को याद नहीं करता, जीवित और मृत की सी है। स़ह़ीह़ जिसने कहा : "मैं अल्लाह की पवित्रता बयान करता हूँ उसकी प्रशंसा के साथ", उसके लिए जन्नत में एक खजूर का पेड़ लगा दिया जाता है। स़ह़ीह़ “निस्संदेह, अल्लाह पवित्र है और केवल पवित्र चीज़ों को ही स्वीकार करता है। अल्लाह ने ईमान वालों को वही आदेश दिया है, जो उसने रसूलों को दिया था। सह़ीह़ अल्लाह की क़सम! मैं दिन में सत्तर बार से अधिक अल्लाह से क्षमा माँगता हूँ और उसके सामने तौबा करता हूँ। स़ह़ीह़ ऐ लोगो! अल्लाह के सामने तौबा करो, क्योंकि खुद मैं दिन में सौ बार तौबा करता हूँ। सह़ीह़ अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब दस्तरख़्वान उठाते तो कहतेः "الحَمْدُ للهِ حَمْدًا كَثِيرًا طَيِّبًا مُبَارَكًا فِيهِ، غَيْرَ مَكْفِيٍّ، وَ सह़ीह़ भला मुझे चैन कैसे मिल सकता है, जबकि सूर में फूँक मारने पर नियुक्त फ़रिश्ते ने सूर को अपने मुँह से लगा रखा है और अनुमति की प्रतीक्षा में है। जैसे ही फू सह़ीह़ ऐ अल्लाह तू ही मेरा बाज़ू और सहायक है। तेरे ही सहारे मैं स्थान बदलता हूँ, तेरी ही मदद से शत्रु पर आक्रमण करता हूँ और तेरी सहायता से युद्ध करता हूँ। सह़ीह़ दो दुआएँ लौटाई नहीं जातीं या कम ही लौटाई जाती हैं; अज़ान के समय की दुआ और युद्ध के समय की दुआ, जब लोग एक-दूसरे से गुथ जाएँ। स़ह़ीह़ जो मुसलमान कोई दुआ करता है, जिसमें गुनाह एवं संबंध विच्छेद न हो, उसे अल्लाह तीन में से कोई एक चीज़ ज़रूर देता है। उसकी दुआ इसी दुनिया में क़बूल कर लेत स़ह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- परेशानी के समय यह दुआ पढ़ा करते थे : (अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है, जो महान एवं सहिष्णु है। अल्लाह सह़ीह़ अली बिन अबू तालिब (रज़ियल्लाहु अंहु) के पास एक सवारी लाई गई, ताकि उसपर सवार हों। जब उन्होंने पायदान पर पाँव रखा, तो 'बिस्मिल्लाह' कहा। सह़ीह़ ऐ अल्लाह, मुझे बुरे व्यवहार, कर्मों, आकांक्षाओं और बीमारियों से बचा। स़ह़ीह़ बंदा अपने रब से सबसे अधिक निकट उस समय होता है, जब वह सजदे में होता है। अतः तुम उसमें ख़ूब दुआएँ किया करो। स़ह़ीह़ कंजूस वह व्यक्ति है, जिसके सामने मेरा नाम लिया जाए और वह मुझपर दरूद न भेजे। ह़सन जिसने खाना खाने के बाद यह दुआ पढ़ीः 'الحمدُ للهِ الذي أَطْعَمَنِي هَذَا، وَرَزَقْنِيهِ مِنْ غَيرِ حَوْلٍ مِنِّي وَلَا قُوَّةٍ' (अर्थात - सारी प्रशंसा सह़ीह़ ऐ अल्लाह, तू साद को रोग मुक्त कर दे! ऐ अल्लाह, तू साद को रोग मुक्त कर दे! स़ह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- सजदे की हालत में यह दुआ किया करते थे : “हे अल्लाह, तू मेरे समस्त पापों को क्षमा कर दे; छोटे-बड़े, अगले-पिछले सह़ीह़ हे अल्लाह, तू मेरे पापों को क्षमा कर दे, जो कुछ भी मैंने पहले किया या बाद में किया, छिपाकर किया या दिखाकर किया। इसकी सनद सह़ीह़ है। ऐ अल्लाह, हम तुझे उनके मुक़ाबले में पेश करते हैं और उनकी बदमाशियों से तेरी पनाह चाहते हैं। स़ह़ीह़ “अल्लाह के निकट सबसे प्रिय वाक्य चार हैं : सुबहान अल्लाह (अल्लाह पाक है), अल-हम्दु लिल्लाह (समस्त प्रकार की प्रशंसा अल्लाह ही के लिए हैं), ला इलाहा इल शवाहिद के आधार पर सह़ीह़ शेष रहने वाली नेक चीज़ें हैंः ला इलाहा इल्लल्लाह (अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं है), सुबहान अल्लाह (अल्लाह पाक है), अल्लाहु अकबर (अल्लाह सबसे बड स़ह़ीह़ अज़ान तथा इक़ामत के बीच की जाने वाली दुआ रद्द नहीं होती। स़ह़ीह़ ऐ अल्लाह! मेरे लिए मेरे धर्म को सुधार दे, जो मेरे मामले का संरक्षण है स़ह़ीह़ ऐ अल्लाह! मेरे गुनाह, मेरी अज्ञानता, अपने सभी कार्यों में मेरे सीमा का उल्लंघन करने को और हर उस बात को, जिसे तू मुझसे ज़्यादा जानता है, क्षमा कर दे। ऐ स़ह़ीह़ ऐ अल्लाह! मैं तुझसे दुनिया एवं आख़िरत में सुरक्षा माँगता हूँ। सह़ीह़ इसने अल्लाह से उसके ऐसे नाम के द्वारा माँगा है कि जिसके द्वारा जब माँगा जाए तो अल्लाह देता है, और जब पुकारा जाए तो अल्लाह क़बूल करता है। स़ह़ीह़ “ऐ अल्लाह! मैं तुझसे जल्द तथा देर से मिलने वाली हर प्रकार की भलाई माँगता हूँ, जो मैं जानता हूँ और जो नहीं जानता। और मैं जल्द तथा देर से आने वाली हर प् स़ह़ीह़ ऐ अल्लाह! मैं तेरी नेमत के छिन के जाने, (विपत्ति में) तेरी प्रदान की हुई सुरक्षा के बदल जाने, तेरी अचानक आपदा तथा तेरे हर प्रकार के क्रोध से तेरी शरण स़ह़ीह़ ऐ अल्लाह! मैं तेरी शरण माँगता हूँ क़र्ज़ के बोझ तथा शत्रुओं के हावी होने और दुश्मनों के हँसने से। ह़सन ऐ अल्लाह! हमने तेरे (अनुग्रह के) साथ सुबह की और तेरे ही (अनुग्रह के) साथ शाम की और हम तेरे ही (नाम) से जीते हैं और तेरे ही (नाम) से मरते हैं, और हमें सह़ीह़ ऐ अल्लाह, जिस प्रकार तूने मेरी शक्ल-सूरत अच्छी बनाई है, उसी प्रकार मेरे अख़लाक़ भी अच्छे बना दे। ह़सन तुम्हारा रब बड़ा ही हया वाला तथा दानशील है। जब कोई बंदा उसके आगे अपने हाथों को फैलाता है, तो उसे उनको खाली लौटाने में शर्म आती है।
بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
بدر पूर्णिमा दिन 16.5 / 29.5
रोशनी 96%
13 दिनों में अमावस्या
سبحان الله وبحمده अल्लाह की महिमा और स्तुति है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद