तुममें से किसी की दुआ उस समय तक क़बूल होती है, जब तक वह जल्दबाजी न करे। अर्थात ऐसा न कहे क…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: तुममें से किसी की दुआ उस समय तक क़बूल होती है, जब तक वह…

عن أبي هريرة رضي الله عنه مرفوعاً: يُستجاب لأحدكم ما لم يَعْجَلْ: يقول: قد دعوت ربي، فلم يستجب لي».
وفي رواية لمسلم: «لا يزال يُستجاب للعبد ما لم يَدْعُ بإثم، أو قطيعة رحم، ما لم يَسْتَعْجِلْ» قيل: يا رسول الله ما الاستعجال؟ قال: «يقول: قد دعوت، وقد دعوت، فلم أر يستجب لي، فَيَسْتَحْسِرُ عند ذلك ويَدَعُ الدعاء».

हदीस की व्याख्या: तुममें से किसी की दुआ उस समय तक क़बूल होती है, जब तक वह…

इस हदीस में अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- बता रहे हैं कि बंदे की दुआ उस समय तक ग्रहण होती है, जब तक वह किसी गुनाह के काम या संबंध विच्छेद की दुआ न करे और जल्दबाज़ी न दिखाए। यह सुन किसी ने कहा कि ऐ अल्लाह के रसूल! जल्दबाज़ी से क्या मुराद है, जिसके कारण दुआ ग्रहण होने से रह जाती है? तो फ़रमाया : बंदा यह कहे कि मैंने बार-बार दुआ की, लेकिन मेरी दुआ ग्रहण नहीं हुई और फिर जल्दबाज़ी दिखाते हुए दुआ करना बंद कर दे।

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الله أكبر अल्लाह सबसे महान है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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