सब्र तो मुसीबत के शुरू में करना होता है।

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: सब्र तो मुसीबत के शुरू में करना होता है।

عن أنس بن مالك رضي الله عنه قال: مرَّ النَّبي - صلى الله عليه وسلم - بامرَأَة تَبكِي عِند قَبرٍ، فقال: «اتَّقِي الله واصْبِري» فقالت: إليك عَنِّي؛ فَإِنَّك لم تُصَب بِمُصِيبَتِي ولم تَعرِفه، فقِيل لها: إِنَّه النَّبِي - صلى الله عليه وسلم - فأتت باب النبي - صلى الله عليه وسلم - فلم تجد عنده بوَّابِين، فقالت: لم أَعرِفكَ، فقال: «إِنَّما الصَّبرُ عِند الصَّدمَةِ الأُولَى».
وفي رواية: «تَبكِي على صبِّي لها».

हदीस की व्याख्या: सब्र तो मुसीबत के शुरू में करना होता है।

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لا إله إلا الله अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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