जनाज़े पर हदीसें

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«जनाज़े» पर 34 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

जनाज़े पर हदीसों की सूची

सह़ीह़ कहो : السلام على أهل الديار من المؤمنين والمسلمين، ويرحم الله المستقدمين منا والمستأخرين، وإنا إن شاء الله بكم للاحقون अर्थात, इस स्थान में निवास करने सह़ीह़ इस उम्मत को क़ब्रों के अंदर आज़माया जाता है। अगर तुम दफ़न करना छोड़ न दो, तो मैं अल्लाह से दुआ करूँ कि तुम्हें भी क़ब्र की वह यातना सुनाए, जो मैं सुनत स़ह़ीह़ इसे तीन बार, पाँच बार या -ज़रूरत महसूस हो तो- इससे अधिक बार पानी तथा बेरी के पत्तों से नहला दो और अंतिम बार काफ़ूर -या थोड़ा सा काफ़ूर- डाल दो। स्नान स़ह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने हमें सात बातों का आदेश दिया है और सात जीचों से रोका है स़ह़ीह़ जनाज़े को जल्दी ले चलो। क्योंकि यदि वह नेक है, तो तुम उसे भलाई की ओर बढ़ा रहे हो और यदि बुरा है, तो एक बुरी चीज़ को तुम अपने कंधों से उतार दोगे। सह़ीह़ हमें जनाज़े के पीछे चलने से मना किया गया है, लेकिन इस मामले में हमपर सख़्ती नहीं बरती गई है। सह़ीह़ बेशक अल्लाह ही के लिए है, जो उसने ले लिया और उसी का है, जो उसने दिया। उसके समीप प्रत्येक वस्तु का समय निश्चित है। अतः अब तू सब्र कर तथा अल्लाह से प्रत सह़ीह़ सब्र तो मुसीबत के शुरू में करना होता है। सह़ीह़ क्या तुम नहीं जानते कि इसलाम पहले के गुनाहों को ख़त्म कर देता है, हिजरत पहले के गुनाहों को ख़त्म कर देती है और हज पहले के गुनाहों को ख़त्म कर देता है? स़ह़ीह़ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मुसीबत के समय चीख़-चीख़ कर रोने वाली, बाल मुँडवाने वाली और कपड़े फाड़ने वाली औरतों से अपने बरी होने का एल सह़ीह़ अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने नज्जाशी के ज़नाज़े की नमाज़ पढ़ी और मैं दूसरी अथवा तीसरी पंक्ति में था। सह़ीह़ ऐ अल्लाह, हमारे जीवित तथा मृत, छोटे तथा बड़े, पुरुष तथा स्त्री और उपस्थित तथा अनुपस्थित सबको क्षमा कर दे। ऐ अल्लाह, हममें से जिसे जीवित रखना हो, इसलाम सह़ीह़ ऐ अल्लाह, अमुक पुत्र अमुक तेरी शरण तथा तेरी सुरक्षा में है। अतः उसे क़ब्र की आज़माइश और आग के अज़ाब से बचा। तू दाता और प्रशंसायोग्य है। ऐ अल्लाह, इसे सह़ीह़ आँखें आँसू बहा रही हैं और दिल शोकाकुुल है, लेकिन हम वही कहते हैं, जो हमारे रब को पसंद हो और ऐ इबराहीम, हम तेरी जुदाई से दुखी हैं। सह़ीह़ मैंने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पीछे एक ऐसी स्त्री की नमाज़-ए-जनाज़ा पढ़ी, जो निफ़ास (वह प्राकृतिक रक्त, जो प्रसव के बाद निकलता है) की अवधि मे सह़ीह़ अल्लाह केरसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को सफ़ेद यमनी कपड़ों में कफ़नाया गया। उनमें न कुर्ता था और न पगड़ी थी। स़ह़ीह़ मरे हुए लोगों को बुरा-भला न कहो, क्योंकि वे उसकी ओर जा चुके हैं, जो कर्म उन्होंने आगे भेजे हैं। स़ह़ीह़ यहूदियों तथा ईसाइयों पर अल्लाह की धिक्कार हो। उन लोगों ने नबियों की क़ब्रों को मस्जिद बना लिया। सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उसी दन नजाशी की मृत्यु की सूचना दी, जिस दिन उनकी मृत्यु हुई थी। आप लोगों के साथ ईदगाह की ओर निकले, उन्हें सफ़ में खड सह़ीह़ "जो जनाज़े में नमाज़ संपन्न होने तक शामिल रहा, उसके लिए एक क़ीरात नेकी है और जो दफ़नाए जाने तक शरीक रहा, उसके लिए दो क़ीरात नेकी है।" कहा गया कि दो क़ सह़ीह़ जो किसी मृतक को ग़ुसल दे और उसके ऐबों को छुपाए, अल्लाह उसे चालिस बार क्षमा करता है। स़ह़ीह़ जब अल्लाह किसी बंदे के बारे में निर्णय करता है कि वह किस ज़मीन में मृत्यु पाएगा, तो वहाँ उसकी ज़रूरत रख देता है। स़ह़ीह़ मर रहे लोगों को "ला इलाहा इल्लल्लाह" पढ़ने के लिए प्रेरित करो। स़ह़ीह़ ''जब कोई व्यक्ति मर जाता है, तो उसके कर्मों का सिलसिला रुक जाता है, सिवाय तीन चीज़ों के : स़दक़ा जारिया (अनवरत चलने वाला दान), ऐसी विद्या छोड़कर जाना सह़ीह़ अबू तलहा -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- का एक पुत्र बीमार था। अबू तलहा कहीं बाहर गए, तो उसकी मृत्यू हो गई। सह़ीह़ जो अल्लाह से मिलना पसंद करता है, अल्लाह भी उससे मिलना पसंद करता है और जो अल्लाह से मिलना नापसंद करता है, अल्लाह भी उससे मिलना नापसंद करता है। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) उहद के शहीदों के पास गए और आठ साल पश्चात उनके लिए दुआ की, जैसे जीवित तथा मृत को विदा कर रहे हैं और उनसे विदा सह़ीह़ जिस मुस्लिम व्यक्ति के बारे में चार व्यक्तियों ने भलाई की गवाही दी, अल्लाह उसे जन्नत में दाख़िल कर देगा ह़सन अब्दुल्लाह बिन अबू औफ़ा ने अपनी एक बेटी के ज़नाजे पर चार तकबीरें कहीं और चौथी तकबीर के बाद दो तकबीरों के बीच जितनी अवधि होती है, उसके समान खड़े रहे और सह़ीह़ इसकी तुमने प्रशंसा की, तो इसके लिए जन्नत अनिवार्य हो गई और इसकी तुमने बुराई की, तो इसके लिए जहन्नम वाजिब हो गई, तुम लोग वास्तव में धरती पर अल्लाह के ग सह़ीह़ आज के बाद मेरे भाई पर रोया न करो ह़सन जो भी मरता है और उसपर रोने वाला कहता है: हे पहाड़! हे सरदार! अथवा इसी प्रकार की दूसरी बातें कहता है, तो दो फ़रिश्ते उस पर लगा दिए जाते हैं, जो उसके सी सह़ीह़ अब्दुल्लाह बिन रवाह़ा (रज़ियल्लाहु अनहु) बेहोश हुए तो उनकी बहन रो रो कर, हे पहाड़! आदि बार- बार कहने लगी, तो होश में आने के पश्चात फ़रमाया: तुमने जो क सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हमसे जो नेक वचन लिए थे कि हम उनमें से किसी में भी आपकी अवज्ञा न करें, वे यह थे कि हम न चेहरे को नोचें और
بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
بدر पूर्णिमा दिन 16.5 / 29.5
रोशनी 96%
13 दिनों में अमावस्या
لا حول ولا قوة إلا بالله अल्लाह के बिना कोई शक्ति और सामर्थ्य नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद