ऐ अल्लाह के रसूल! मैंने जाहिलीयत के ज़माने में मन्नत मानी थी कि मैं मस्जिदे हराम में एक रा…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: ऐ अल्लाह के रसूल! मैंने जाहिलीयत के ज़माने में मन्नत मा…

عن عمر بن الخطاب رضي الله عنه قال: قلت: يا رسول الله، إني كنت نَذَرْتُ في الجَاهلية أن أعتكف ليلة -وفي رواية: يومًا- في المسجد الحرام ؟ قال: «فَأَوْفِ بِنَذْرِكَ».

हदीस की व्याख्या: ऐ अल्लाह के रसूल! मैंने जाहिलीयत के ज़माने में मन्नत मा…

उमर बिन खत्ताब -रज़ियल्लाहु अन्हु- ने जाहिलियत के युग में मस्जिदे हराम में एक रात एतेकाफ़ करने की मन्नत मानी थी। उन्होंने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से इस मन्नत के हुक्म के बारे पूछा, तो आपने मन्नत पूरी करने का आदेश दिया।

श्रेणियाँ : इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह · रोज़े · फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह · ऐतिकाफ़

بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
بدر पूर्णिमा दिन 16.6 / 29.5
रोशनी 96%
13 दिनों में अमावस्या
الحمد لله अल्लाह की सारी प्रशंसा है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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