अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- सारगर्भित दुआओं को पसंद करते थे और इससे इतर दुआओ…
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हदीस वर्णनकर्ता: इस ह़दीस़ को अबू दावूद और अह़मद ने रिवायत किया है
स़ह़ीह़
27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
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हदीस का पाठ: अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- सारगर्भित दुआ…
हदीस की व्याख्या: अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- सारगर्भित दुआ…
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ऐसी सारगर्भित दुआएँ पसंद करते थे, जो दुनिया एवं आख़िरत की भलाइयों पर सम्मिलित हों, कम शब्दों में अधिक अर्थों को समेटे हुए हों तथा उनके अंदर अल्लाह की प्रेशंसा और सही उद्देश्य निहित हों। जिन दुआओं के अंदर ये विशेषताएँ न हों, उनसे आप गुरेज़ करते थे।
सीख: अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- सारगर्भित दुआ…
- दुआएँ छोटी लेकिन व्यापक और अच्छे अर्थ वाले शब्दों में करना मुसतहब है। इसमें बनावट से काम लेना मकरूह है। यह अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के तरीक़े के विरुद्ध भी है।
- अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को सारगर्भित शब्दों में बात रखने की क्षमता प्रदान की गई थी।
- कोशिश यह हो कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से साबित दुआओं को पढ़ा जाए, चाहे लम्बी और अधिक शब्दों वाली ही क्यों न हो। इस प्रकार सारी दुआएँ सारगर्भित दुआओं के दायरे में आती हैं।
श्रेणियाँ :
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بسم الله الرحمن الرحيم
मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
أستغفر الله
मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ