ऐ अबू हुरैरा! मेरे इन दो जूतों को लेकर जाओ और इस बाग के बाहर जिससे भी भेंट हो, जो दिल के य…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है

स़ह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: ऐ अबू हुरैरा! मेरे इन दो जूतों को लेकर जाओ और इस बाग के…

हदीस की व्याख्या: ऐ अबू हुरैरा! मेरे इन दो जूतों को लेकर जाओ और इस बाग के…

अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अपने कुछ साथियों के साथ बैठे हुए थे। सभा में अबू बक्र और उमर -रज़ियल्लाहु अनहुमा- जैसे सहाबा भी मौजूद थे। इसी बीच आप उठकर कहीं चले गए और देर तक वापस नहीं आए, तो सहाबा के अंदर यह आशंका पैदा हो गई कि कहीं आपके साथ कोई अनहोनी न घट गई हो। दुश्मनों ने आपको गिरफ़्तार न कर लिया हो या कुछ और न घटित हुआ हो। ऐसे में सहाबा घबराए और इधर-उधर ढूँढने निकल पड़े। सबसे पहले अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु-घबराए हुए निकले। वह ढूँढते हुए बनू नज्जार के एक बाग़ तक पहुँचे और इस आशा में बाग़ के चारों ओर चक्कर लगाने लगे कि शायद कोई खुला द्वार मिल जाए, द्वार तो नहीं मिला, अल्बत्ता एक छोटी-सी नाली मिली, जिससे पानी अंदर जाता था। वह अपने शरीर को समेटकर नाली से अंदर गए और देखा कि वहाँ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मौजूद हैं। उन्हें देख आपने पूछा : अबू हुरैरा तुम? जवाब दिया : जी मैं। पूछा : तुम यहाँ क्या कर रहे हो? जवाब दिया : आप हमारे साथ मौजूद थे। फिर निकल गए और देर तक वापस नहीं आए, तो हमें यह आशंका सताने लगी कि कहीं आपको हमसे रोक न लिया गया हो और हमारे अन्दर डर पैदा हुआ। इसलिए हम आपको ढूँढने निकल पड़े। सबसे पहले मैं ही डर कर निकला। मैं इस बाग़ के पास आया और लौमड़ी की तरह शरीर को समेटकर अंदर दाख़िल हुआ। अन्य लोग भी मेरे पीछे-पीछे आ रहे हैं। यह सुन अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उनको उनके सच्चे होने की निशानी के तौर पर अपने दोनों जूते दे दिए और उनसे कह दिया कि मेरे इन दोनों जूतों को लेकर जाओ और इस बाग़ के बाहर जिसे भी हार्दिक विश्वास के साथ इस बात की गवाही देते हुए पाओ कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है, उसे जन्नती होने का सुसमाचर सुना दो। अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- निकले, तो सबसे पहले उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- मिले। उन्होंने पूछा : अबू हुरैरा! ये दोनों जूते कैसे हैं? उत्तर दिया : ये दोनों जूते अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के हैं। आपने मुझे अपने दोनों जूतों के साथ इस काम के लिए भेजा है कि जो व्यक्ति मुझे हार्दिक विश्वास के साथ इस बात की गवाही देता हुआ मिले कि अल्लाह के अतिरिक्त कोई सत्य पूज्य नहीं है, उसे मैं जन्नत का सुसमाचार सुना दूँ। इतना सुनकर उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- ने अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- के सीने पर ऐसा मुक्का मारा कि वह नितंब के बल पर जा गिरे। साथ ही उन्होंने वापस जाने को भी कह दिया। अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का कहना है कि उनकी बात सुनकर मैं अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की तरफ लौट पड़ा। मैं घबराया हुआ था, चेहरे का रंग बदला हुआ था, रोने जैसा लग रहा था। मेरे पीछे-पीछे उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- भी चल पड़े। मुझे देख आपने पूछा : अबू हुरैरा, बात क्या है? मैंने कहा : मेरी मुलाक़ात उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- से हुई और मैंने उनको वह सूचना दी, जिसके साथ आपने मुझे भेजा था, तो उन्होंने मुझे इस तरह मुक्का रसीद कर दिया कि मैं नितंब के बल गिर पड़ा। फिर उन्होंने मुझे वापस लौट जाने को कहा। यह सुन आपने उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- से पूछा : तुमने इस तरह का काम क्यों किया? उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- ने जवाब दिया : ऐ अल्लाह के रसूल! मेरे माँ बाप आपपर फ़िदा हों, क्या आपने अबू हुरैरा को अपने दोनों जूते देकर इस काम के लिए भेजा था कि जो व्यक्ति हार्दिक विश्वास के साथ इस बात की गवाही दे कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है, उसे वह जन्नत का सुसमाचार सुना दें? जवाब दिया : हाँ, मैंने ऐसा किया है। उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- ने कहा : आप ऐसा न करें। मुझे इस बात की आशंका है कि लोग इस वाक्य को कहने भर पर स्वयं को समेट लेंगे और अमल पर ध्यान नहीं देंगे। इसलिए लोगों को अमल करने दें। उनकी बात सुन अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : तब उन्हें अमल करने दो।

सीख: ऐ अबू हुरैरा! मेरे इन दो जूतों को लेकर जाओ और इस बाग के…

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الحمد لله अल्लाह की सारी प्रशंसा है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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