उपासना (इबादत) से संबंधित एकेश्वरवाद पर हदीसें

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«उपासना (इबादत) से संबंधित एकेश्वरवाद» पर 43 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

उपासना (इबादत) से संबंधित एकेश्वरवाद पर हदीसों की सूची

स़ह़ीह़ ऐ अबू हुरैरा! मेरे इन दो जूतों को लेकर जाओ और इस बाग के बाहर जिससे भी भेंट हो, जो दिल के यक़ीन के साथ इस बात की गवाही देता हो कि अल्लाह के सिवा कोई सत सह़ीह़ ऐ अबू आइशा! तीन बातें ऐसी हैं कि जिसने उनमें से कोई एक बात कही, उसने अल्लाह पर बहुत बड़ा झूठ बाँधा सह़ीह़ पूरी धरती मस्जिद है, सिवाय क़ब्रगाह और स्नान घर के। स़ह़ीह़ “क़ब्रों पर मत बैठो और उनकी ओर मुँह करके नमाज़ न पढ़ो।” सह़ीह़ यह जो नमाज़ है, इसमें लोगों की आम बात-चीत सही नहीं है। इसमें तो बस तसबीह, तकबीर और क़ुरआन की तिलावत होती है। स़ह़ीह़ वे ऐसे लोग हैं कि उन लोगों के अंदर जब कोई सदाचारी बंदा अथवा सदाचारी व्यक्ति मर जाता, तो उसकी कब्र के ऊपर मस्जिद बना लेते स़ह़ीह़ सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह तुम्हें इस बात से रोकता है कि तुम अपने बाप-दादाओं की क़सम खाओ स़ह़ीह़ यहूदियों और ईसाइयों पर अल्लाह की लानत हो, उन्होंने अपने नबियों की क़ब्रों को मस्जिद बना लिया। स़ह़ीह़ मैं तमाम साझेदारों की तुलना में साझेदारी से अधिक बेनियाज़ हूँ। जिसने कोई कार्य किया और उसमें किसी को मेरा साझी ठहराया, मैं उसके साथ ही उसके साझी बनाने स़ह़ीह़ मैं अल्लाह के निकट इस बात से बरी होने का एलान करता हूँ कि तुममें से कोई मेरा 'ख़लील' (अनन्य मित्र) हो। क्योंकि अल्लाह ने जैसे इबराहीम को 'ख़लील' बनाया सभी सनदों के आधार पर स़़ह़ीह़ 'जो अल्लाह चाहे एवं अमुक चाहे' ना कहो, बल्कि 'जो अल्लाह चाहे फिर अमुक चाहे' कहो। सह़ीह़ मेरे निकट अल्लाह की झूठी कसम खाना किसी और की सच्ची कसम खाने से अधिक प्रिय है। स़ह़ीह़ तुम लोग मेरे प्रति प्रशंसा और तारीफ़ में उस प्रकार अतिशयोक्ति न करो, जिस प्रकार ईसाइयों ने मरयम के पुत्र के बारे किया। मैं केवल अल्लाह का बंदा हूँ। अत स़ह़ीह़ क़यामत के दिन मेरी सिफ़ारिश प्राप्त करने की सबसे बड़ी ख़ुश नसीबी उस व्यक्ति को हासिल होगी, जिसने अपने दिल या साफ़ नीयत से “ला इलाहा इल्लल्लाह” कहा हो। स़ह़ीह़ जिस व्यक्ति की मृत्यु इस अवस्था में हुई कि वह किसी को अल्लाह का समकक्ष बनाकर पुकार रहा था, वह जहन्नम में प्रवेश करेगा। स़ह़ीह़ अतिशयोक्ति करने वाले हलाक हो गए स़ह़ीह़ कोई संक्रामकता नहीं और न कोई अपशगुनता। हाँ, मुझे फ़ाल (शगुन) अच्छा लगता है।" सहाबा ने पूछा : शगुन क्या है? फ़रमाया : "अच्छी बात। स़ह़ीह़ लेकिन किस बात पर बैअत करें? फ़रमाया : "इस बात पर कि केवल अल्लाह की इबादत करोगे, किसी को उसका साझी नहीं बनाओगे, पाँच वक्त की नमाज़ें पढ़ोगे और अल्लाह क सह़ीह़ जिसे निर्धनता का सामना हो और उसे लोगों के सामने रखे, उसकी निर्धनता कभी दूर नहीं होगी और जो उसे अल्लाह के सामने रखे, उसे अल्लाह की ओर से रोज़ी प्रदान क सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मेरे यहाँ आए और एक लटके हुए मश्क के मुँह से खड़े-खड़े पानी पी लिया। यह देख, मैंने जाकर मश्क का मुँह काट लिया स़ह़ीह़ यहूदियों तथा ईसाइयों पर अल्लाह की धिक्कार हो। उन लोगों ने नबियों की क़ब्रों को मस्जिद बना लिया। स़ह़ीह़ सुन लो, तुम लोग भी पहले समुदायों के पदचिह्नों पर चल पड़ोगे। इसकी सनद ह़सन है एक व्यक्ति अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आया, किसी विषय में आपसे बात की और इसी दौरान कहा : वही होगा जो अल्लाह चाहेगा और आप चाहेंगे। उस सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब किसी व्यक्ति को किसी सेना अथवा उसकी छोटी टुकड़ी का नेतृत्व प्रदान करते तो उसे अल्लाह के भय तथा मुसलमान सा स़ह़ीह़ क्या मैं तुम्हें उस मुहिम पर न भेजूँ, जिसपर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मुझे भेजा था? आपने मुझे आदेश दिया था कि तुम्हें जो भी चित्र मिल इसकी सनद सह़ीह़ है। सबसे बड़े गुनाह हैंः अल्लाह का साझी बनाना, अल्लाह के उपाय से निश्चिंत हो जाना तथा उसकी दया एवं कृपा से निराश होना। ह़सन इसे निकाल दो, क्योंकि यह तुम्हारी बीमारी को बढ़ाने ही का काम करेगा। तथा यदि तुम इसे पहनकर मरोगे, तो कभी सफल नहीं हो सकोगे। स़ह़ीह़ बंदों पर अल्लाह का अधिकार यह है कि बंदे उसकी इबादत करें और किसी को उसका साझी न बनाएँ। जबकि अल्लाह पर बंदों का अधिकार यह है कि अल्लाह किसी ऐसे व्यक्ति स़ह़ीह़ जो इस हाल में मरा कि किसी को अल्लाह का साझी नहीं बनाया, वह जन्नत में प्रवेश करेगा और जो इस हाल में मरा कि किसी को अल्लाह का साझी बनाता रहा, वह जहन्नम स़ह़ीह़ जो अल्लाह से इस अवस्था में मिलेगा कि किसी को उसका साझी न बनाया होगा, उसे कोई पाप हानि नहीं पहुँचाएगा, और जो उससे इस अवस्था में मिलेगा कि किसी को उसका स़ह़ीह़ ग़ैब की चाबियां पांच हैं स़ह़ीह़ अल्लाह तुम्हारे लिए तीन बातों को पसंद करता है और तुम्हारे लिए तीन बातों को नापसंद करता है। स़ह़ीह़ किसी ऊँट के गले में कोई ताँत अथवा अन्य कोई वस्तु बंधी मिले, तो उसे रहने न दिया जाए, बल्कि काट दिया जाए। ह़सन जिसने तावीज़ लटकाया, उसने शिर्क किया। ह़सन जिसने कोई वस्तु लटकाई, उसे उसी के हवाले कर दिया जाता है। सह़ीह़ ऐ रुवैफ़े, हो सकता है कि तुम्हें लंबी आयु मिले। लोगों को बता देना कि जो अपनी दाढ़ी में गिरह लगाएगा, ताँत गले में डालेगा या किसी पशु के गोबर अथवा हड्डी स़ह़ीह़ जिसने 'ला इलाहा इल्लल्लाह' का इक़रार किया और अल्लाह के अतिरिक्त पूजी जाने वाली अन्य वस्तुओं का इनकार कर दिया, उसका धन तथा प्राण सुरक्षित हो जाएगा और उ स़ह़ीह़ “अल्लाह जहन्नमियों में सबसे हलका अज़ाब पाने वाले व्यक्ति से कहेगा : यदि धरती में मौजूद सारी चीज़ें तुम्हारी होतीं, तो क्या तुम इस अज़ाब से छुटकारा पान स़ह़ीह़ यह सच्ची बात वह होती है, जिसे जिन्न उचक लेता है और उसे अपने इंसान दोस्त के कान में ऐसी आवाज़ में डाल देता है, जो मुर्गी के कुड़कुड़ाने जैसी होती है, फ सह़ीह़ बेशक अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपशगुन नहीं लेते थे सह़ीह़ जो लोग यह चित्र बनाते हैं, उन्हें क़यामत के दिन यातना दी जाएगी और उनसे कहा जाएगा: जो तुमने बनाया है, उसे जीवित करो स़ह़ीह़ फ़रिश्ते उस घर में प्रवेश नहीं करते जिस घर में कुत्ते और चित्र हों। स़ह़ीह़ बुतों तथा अपने बाप- दादाओं की क़सम मत खाओ।
بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
بدر पूर्णिमा दिन 16.5 / 29.5
रोशनी 96%
13 दिनों में अमावस्या
لا إله إلا الله अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद