इस्लाम > Hi > हदीस > अकद > क्या मैं तुम्हें उस मुहिम पर न भेजूँ, जिसपर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मुझ…
स़ह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयعن أبي الهيَّاج الأسدي قال: قَالَ لِي عَلِيُّ بْنُ أَبِي طَالِبٍ: أَلَا أَبْعَثُكَ عَلَى مَا بَعَثَنِي عَلَيْهِ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ؟ أَنْ لَا تَدَعَ تِمْثَالًا إِلَّا طَمَسْتَهُ، وَلَا قَبْرًا مُشْرِفًا إِلَّا سَوَّيْتَهُ.
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अपने साथियों को यह कहकर भेजते थे कि तुम्हें जो भी प्रतिमा मिले, उसे नष्ट कर दो या मिटा दो। हदीस में "تمثالًا" शब्द आया है, जिसके मायने प्राण वाली वस्तु का चित्र है, चाहे वह आकार वाला हो या बिना आकार वाला।
इसी तरह जो भी ऊँची क़ब्र मिले, उसे ज़मीन के बराबर कर दो और उसपर बने हुए भवन आदि को गिरा दो या फिर उसे इस तरह ज़मीन के बराबर कर दो कि ज़्यादा उठी हुई न हो। लगभग एक बित्ता ऊँची हो। उससे ज़्यादा नहीं।
श्रेणियाँ : अक़ीदा · सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह पर ईमान · उपासना (इबादत) से संबंधित एकेश्वरवाद