मेरे निकट अल्लाह की झूठी कसम खाना किसी और की सच्ची कसम खाने से अधिक प्रिय है।

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे इब्ने अबी शैबा ने रिवायत किया है। - इसे अब्दुर रज़्ज़ाक़ ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: मेरे निकट अल्लाह की झूठी कसम खाना किसी और की सच्ची कसम…

عن عبد الله بن مسعود رضي الله عنه قال: "لأن أحلف بالله كاذبًا أحب إليَّ من أن أحلف بغيره صادقًا".

हदीस की व्याख्या: मेरे निकट अल्लाह की झूठी कसम खाना किसी और की सच्ची कसम…

अब्दुल्लाह बिन मसऊद -रज़ियल्लाहु अनहु- कहते हैं कि यदि मान लिया जाए कि मैं किसी बात पर अल्लाह की झूठी क़सम खा लेता हूँ, तो यह मेरे निकट इससे अधिक प्रिय है कि मैं किसी बात पर अल्लाह के सिवा किसी और की सच्ची क़सम खाऊँ। उन्होंने अल्लाह की झूठी कसम को किसी अन्य की सच्ची क़सम से बेहतर इसलिए समझा कि अल्लाह की क़सम में तौहीद की नेकी है और झूठ का गुनाह है। जबकि किसी और की सच्ची कसम में सच्चाई की नेकी है और शिर्क का गुनाह। ज़ाहिर सी बात है कि तौहीद की नेकी सच्चाई की नेकी से बड़ी है और झूठ का गुनाह शिर्क के गुनाह से कमतर है।

श्रेणियाँ : अक़ीदा · सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह पर ईमान · उपासना (इबादत) से संबंधित एकेश्वरवाद

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اللهم صل على محمد ऐ अल्लाह, मुहम्मद पर दरूद भेज

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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