बुतों तथा अपने बाप- दादाओं की क़सम मत खाओ।
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हदीस वर्णनकर्ता: इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
स़ह़ीह़
27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
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हदीस का पाठ: बुतों तथा अपने बाप- दादाओं की क़सम मत खाओ।
हदीस की व्याख्या: बुतों तथा अपने बाप- दादाओं की क़सम मत खाओ।
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम "तवाग़ी" की क़सम खाने से मना फ़रमा रहे हैं। "तवाग़ी" बहुवचन है, "ताग़ियह" का। मुराद ऐसे बुत हैं, जिनकी पूजा अल्लाह को छोड़कर मुश्रिक लोग किया करते थे। यही बुत उनकी सरकशी एवं अविश्वास का सबब थे। इसी प्रकार आप पूर्वजों की क़सम खाने से मना कर रहे हैं। क्योंकि इस्लाम-पूर्व युग में अरबों में अपने बाप दादाओं की क़सम खाकर गर्व और सम्मान की भावना रखने का प्रचलन था।
सीख: बुतों तथा अपने बाप- दादाओं की क़सम मत खाओ।
- क़सम बस अल्लाह और उसके नामों एवं गुणों की खाना जायज़ है।
- अल्लाह के स्थान पर पूजे वाले जाने बुतों, अपने पूर्वजों, सरगनों, मूर्तियों और इस प्रकार की अन्य असत्य चीज़ों की क़सम खाना जायज़ नहीं है।
- अल्लाह के अतिरिक्त की क़सम खाना वैसे तो छोटा शिर्क है, लेकिन दिल में उसकी अल्लाह के जैसा सम्मान बैठ जाए या उसे इबादत का हक़दार समझ लिया जाए, तो यह बड़ा शिर्क हो जाता है।
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अक़ीदा
· सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह पर ईमान
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بسم الله الرحمن الرحيم
मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
سبحان الله
अल्लाह की पवित्रता है