अक़ीदा पर हदीसें

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«अक़ीदा» पर 468 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

अक़ीदा पर हदीसों की सूची

स़ह़ीह़ क़यामत के दिन किसी बंदे के पांव उस समय तक नहीं हिलेंगे, जब तक उसकी आयु के बारे में न पूछ लिया जाए कि उसे किस काम में लगाया और उसके ज्ञान के बारे में न स़ह़ीह़ मैं यह झंडा एक ऐसे व्यक्ति को दूँगा, जो अल्लाह और उसके रसूल से प्यार करता हो और अल्लाह उसके हाथों विजय प्रदान करेगा। सह़ीह़ अल्लाह ने जब मखलूक़ की सृष्टि की, तो एक किताब में, जो उसके पास अर्श पर है, लिख दियाः मेरी रहमत मेरे क्रोध पर हावी रहेगी। स़ह़ीह़ ईमान वालों का उदाहरण, उनके एक-दूसरे से प्रेम, दया और करुणा में, शरीर की तरह है, कि जब उसका कोई अंग कष्ट में होता है, तो पूरा शरीर जागने एवं बुख़ार के सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने दस लोगों का के एक सैन्य दल जसूसी के लिए भेजा और आसिम बिन साबित अंसारी (रज़ियल्लाहु अंहु) को उसका प्रमुख ब सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक व्यक्ति को एक सैन्यदल का अमीर बनाकर भेजा। वह अपने साथियों को नमाज़ पढ़ाते समय कुरआन पढ़ता, तो अंत में सह़ीह़ अली बिन अबू तालिब (रज़ियल्लाहु अंहु) के पास एक सवारी लाई गई, ताकि उसपर सवार हों। जब उन्होंने पायदान पर पाँव रखा, तो 'बिस्मिल्लाह' कहा। स़ह़ीह़ एक मुसलमन के दूसरे मुसलमान पर छह अधिकार हैं।" पूछा गया : ऐ अल्लाह के रसूल! वो क्या हैं? फ़रमाया : "जब उससे मिलो तो सलाम करो, जब वह आमंत्रण दे तो उसका सह़ीह़ तथा जो किसी इमाम की बैअत करे और उसे अपना हाथ तथा अपने दिल का फल दे दे, उसे चाहिए कि जहाँ तक हो सके, उसका अनुसरण करे। फिर अगर कोई दूसरा उसे अपने मातहत ह़सन जो किसी समुदाय से अनुरूपता ग्रहण करे, वह उसी में से है। स़ह़ीह़ मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से पूछा कि सबसे बड़ा गुनाह क्या है? तो फ़रमाया : "यह है कि तुम अल्लाह का साझी बनाओ, हालाँकि उसी ने तुम क स़ह़ीह़ किसी मुसलमान के लिए हलाल नहीं है कि अपने भाई से तीन दिन से अधिक बात-चीत बंद रखे, इस प्रकार कि दोनों मिलें, लेकिन यह भी मुँह फेर ले और वह भी मुँह फेर ल ह़सन जो किसी को हानि पहुंचाएगा, अल्लाह उसको हानि पहुंचाएगा और जो किसी को कठिनाई में डालेगा, अल्लाह उसे कठिनाई में डालेगा। स़ह़ीह़ यहूदियों तथा ईसाइयों पर अल्लाह की धिक्कार हो। उन लोगों ने नबियों की क़ब्रों को मस्जिद बना लिया। स़ह़ीह़ वह व्यक्ति हममें से नहीं, जो गालों पर थप्पड़ मारे, गिरेबान फाड़े और जाहिलियत का कोई बोल बोले। सह़ीह़ क़ुरआन पढ़ो; क्योंकि क़ुरआन क़यामत के दिन अपने पढ़ने वालों के लिए सिफ़ारिशी बनकर आएगा। सह़ीह़ जिसके पास उसके भाई का, इज़्ज़त व आबरू या किसी और चीज़ से संबंधित कोई हक़ हो, वह आज ही उससे गरदन छुड़ा ले, इससे पहले कि वह दिन आ जाए, जब उसके पास न दीन सह़ीह़ उनमें से कुछ ऐसे होंगे जिनके टख़नों तक आग पहूँचेगी, तो कुछ लोगों के घुटनों तक और कुछ के कमर तक। वहीं कुछ लोग ऐसे भी होंगे, जिनकी हँसली तक अग पहुँच रही सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने पानी का एक बरतन मँगवाया, तो आपके पास एक बड़ा प्याला लाया गया, जिसमें थोड़ा-सा पानी था। सो, आपने उसमें अपनी ऊँगलियाँ ह़सन हे आदम के पुत्र! जब तक तू मुझे पुकारता रहेगा तथा मुझसे आशा रखेगा, मैं तेरे पापों को क्षमा करता रहूँगा, चाहे वह जितने भी हों, मैं उसकी परवाह नहीं करूँग सह़ीह़ प्रत्येक बंदा (मुत्यु पश्चात) उसी अवस्था में उठाया जाएगा, जिसमें उसकी मृत्यु हुई थी। सह़ीह़ लोग क़यामत (महा प्रलय) के दिन नंगे पाँव, नंगे शरीर तथा बिना ख़तना किए हुए उठाए जाएँगे। सह़ीह़ पवित्र एवं सर्वशक्तिमान अल्लाह ऐसे दो आदमियों को देखकर हँसता है, जिनमें से एक व्यक्ति दूसरे को क़त्ल करता है और (फिर भी) दोनों जन्नत में प्रवेश कर जात सह़ीह़ लोग सारे संसार के पालनहार के समक्ष खड़े होंगे, यहाँ तक कि उनमें से कुछ लोग अपने आधे कानों तक पसीने में डूबे हुए होंगे। स़ह़ीह़ “शक्तिशाली मोमिन कमज़ोर मोमिन के मुकाबले में अल्लाह के समीप अधिक बेहतर तथा प्रिय है, किंतु प्रत्येक के अंदर भलाई है। सह़ीह़ सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह क़यामत के दिन कहेगाः ऐ आदम के पुत्र, मैं बीमार था, तो तू मेरा हाल जानने नहीं आया। दोनों रिवायतों को मिलाकर सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब खाना खाते, तो अपनी तीनों उँगलियों को चाट लेते। सह़ीह़ उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अंहु) ने पहले हिजरत करने वाले मुहाजिरों के लिए पेंशन की राशि निर्धारित की। स़ह़ीह़ बेशक तुम अपने रब को उसी तरह देखोगे, जैसे इस चाँद को देख रहे हो। उसे देखने में तुम्हें कोई दिक़्क़त नहीं होगी सह़ीह़ जब तुम्हें धरती के किसी भाग में ताऊन (प्लेग) फैलने का समाचार मिले, तो वहाँ न जाओ और यदि ऐसी जगह फैले जहाँ तुम (पहले से) उपस्थित हो, तो फिर वहाँ से न भ सह़ीह़ एक बार अय्यूब (अलैहिस्सलाम) नग्न होकर स्नान कर रहे थे कि उनपर सोने की टिड्डी गिरने लगी। सह़ीह़ जिबरील (अलैहिस्सलाम) नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास बैठे हुए थे कि ऊपर से एक आवाज़ सुनी। सह़ीह़ तुम्हारे स्वभाव में दो ऐसी बातें हैं, जिन्हें अल्लाह पसंद करता है : सहनशीलता और धैर्य। स़ह़ीह़ निश्चय ही अल्लाह अत्याचारी को छूट देता रहता है और जब पकड़ता है, तो छोड़ता नहीं है सह़ीह़ याद रहे, रक्त एवं धन से संबंधित जाहिलियत के समय की वह सारी बातें जो गौरवपूर्ण तरीक़े से बयान की जाती हैं और जिनके दावे किए जाते हैं, मेरे पाँव तले हैं सह़ीह़ नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने ज़नाने मर्द और मर्दानी औरतों पर लानत फरमाई है तथा आपने फ़रमाया : “उन्हें अपने घरों से निकाल दो।” सह़ीह़ क़यामत के दिन हकदारों को उनके हक़ दिलवाए जाएँगे, यहाँ तक कि बिना सींग वाली बकरी को सींग वाली बकरी से बदला दिलवाया जाएगा। सह़ीह़ यदि तुम्हें मालूम हो जाता कि महान अल्लाह के निकट तुम्हारे लिए क्या रखा है, तो तुम चाहते कि तुम्हारी निर्धनता तथा हाजतमंदी और बढ़ जाए। सह़ीह़ ऐ ख़ालिद, मेरे बाद बहुत-सी घटनाएँ, फ़ितने और मतभेद उत्पन्न होंगे। अतः, यदि तुमसे हो सके कि तुम अल्लाह के मारने वाले बंदे की बजाय मरने वाले बंदे बनो, त सह़ीह़ हम लोग हज्जतुल वदा के बारे में बात कर रहे थे और नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हमारे बीच मौजूद थे, लेकिन हमें पता नहीं था कि हज्जतुल वदा क्या है। सह़ीह़ प्रत्येक नबी ने अपनी क़ौम को झूठे काना से डराया है सह़ीह़ शिफ़ाअत वाली हदीस़ सह़ीह़ एक व्यक्ति अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आकर कहने लगाः ऐ अल्लाह के रसूल! मैं (भूख से) निढाल हूँ। स़ह़ीह़ सुन लो, तुम लोग भी पहले समुदायों के पदचिह्नों पर चल पड़ोगे। इसकी सनद ह़सन है एक व्यक्ति अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आया, किसी विषय में आपसे बात की और इसी दौरान कहा : वही होगा जो अल्लाह चाहेगा और आप चाहेंगे। उस स़ह़ीह़ क़यामत के दिन सबसे अधिक कठोर यातना उन लोगों को होगी, जो अल्लाह की सृष्टि की समानता प्रकट करते हैं। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब किसी व्यक्ति को किसी सेना अथवा उसकी छोटी टुकड़ी का नेतृत्व प्रदान करते तो उसे अल्लाह के भय तथा मुसलमान सा स़ह़ीह़ क्या मैं तुम्हें उस मुहिम पर न भेजूँ, जिसपर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मुझे भेजा था? आपने मुझे आदेश दिया था कि तुम्हें जो भी चित्र मिल सारी रिवायतों को मिलाकर सह़ीह़ उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अंहु) ने लिखा थाः हर जादूगर पुरुष एवं स्त्री को क़त्ल कर दो। सह़ीह़ अगर तुम उहुद पर्वत के बराबर भी सोना खर्च कर दो तो अल्लाह उसे ग्रहण नहीं करेगा, जब तक तक़दीर पर ईमान न रखो और इस बात पर विश्वास न रखो कि जो चीज़ तुम्हे सह़ीह़ अल्लाह ने सबसे पहले क़लम को पैदा किया। फिर उसे लिखने का आदेश दिया तो उसने कहाः ऐ मेरे रब! मैं क्या लिखूँ? अल्लाह ने कहाः क़यामत तक पैदा होने वाली सारी ह़सन वह व्यक्ति हममें से नहीं, जिसने अपशगुन लिया अथवा जिसके लिए अपशगुन लिया गया, जिसने ओझा वाला कार्य किया अथवा ओझा वाला कार्य किसी से करवाया, जिसने जादू क स़ह़ीह़ जो व्यक्ति किसी ग़ैब की बात बताने वाले के पास जाकर उससे कुछ पूछे, उसकी चालीस दिन की नमाज़ क़बूल नहीं होती। स़ह़ीह़ जिसने नक्षत्र के ज्ञान का कुछ अंश प्राप्त किया, उसने जादू का कुछ अंश प्राप्त किया। वह आगे नक्षत्र के बारे में जितना ज्ञान प्राप्त करता जाएगा, जादू के इसकी सनद सह़ीह़ है। सबसे बड़े गुनाह हैंः अल्लाह का साझी बनाना, अल्लाह के उपाय से निश्चिंत हो जाना तथा उसकी दया एवं कृपा से निराश होना। सह़ीह़ अल्लाह तआला फरमाता हैः प्रतिष्ठा मेरा तहबंद और अभिमान मेरी चादर है। अतः, जो उन दोनों में से कोई भी चीज़ मुझसे खींचेगा, मैं उसे यातना में डालूँगा। सह़ीह़ जिस आदमी ने (अपने पिता को जानते हुए) यह दावा किया कि उसका पिता कोई और है, वह काफ़िर हो गया तथा जिसने किसी ऐसी चीज़ का दावा किया जो उसकी नहीं है, वह हम सह़ीह़ एक व्यक्ति सूरा कह्फ़ पढ़ रहा था और उसके निकट ही एक घोड़ा रस्सियों से बंधा हुआ था। सह़ीह़ ऐ लोगो! स्वंय अपने आप पर दया करो। तुम किसी बहरे तथा ग़ायब को नहीं बुला रहे हो, वह तुम्हारे साथ है और वह बहुत ही सुनने वाला और समीप है सह़ीह़ तुझे दाऊद वंश की बाँसुरियों में एक बाँसुरी दी गई है
بسم الله الرحمن الرحيم बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
الأربعاء 16 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 17.2 / 29.5
रोशनी 93%
12 दिनों में अमावस्या
أستغفر الله मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद