ऐ अल्लाह, मेरी क़ब्र को बुत न बनने देना
इस्लाम > Hi > हदीस > अकद > ऐ अल्लाह, मेरी क़ब्र को बुत न बनने देना
हदीस वर्णनकर्ता: इसे अह़मद ने रिवायत किया है
स़ह़ीह़
27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समय
हदीस का पाठ: ऐ अल्लाह, मेरी क़ब्र को बुत न बनने देना
عن أبي هريرة رضي الله عنه عن النبي صلى الله عليه وسلم: «اللهُمَّ لَا تَجْعَلْ قَبْرِي وَثَنًا، لَعَنَ اللهُ قَوْمًا اتَّخَذُوا قُبُورَ أَنْبِيَائِهِمْ مَسَاجِدَ».
हदीस की व्याख्या: ऐ अल्लाह, मेरी क़ब्र को बुत न बनने देना
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने रब से दुआ की है कि आपकी क़ब्र को बुत न बनने दे कि लोग उसका सम्मान करके और उसकी ओर मुँह करके सजदा करके उसकी इबादत करने लगें। फिर आपने बताया कि अल्लाह ने उन लोगों को अपनी रहमत से दूर कर दिया है, जिन्होंने अपने नबियों की क़ब्रों को मस्जिद बना डाला। क्योंकि उनको मस्जिद बनाना उनकी इबादत करने तथा उनके साथ आस्था स्थापित करने का कारण है।
सीख: ऐ अल्लाह, मेरी क़ब्र को बुत न बनने देना
- नबियों तथा नेक लोगों की क़ब्रों के बारे में शरई सीमा से आगे बढ़ना दरअसल अल्लाह को छोड़ उनकी इबादत करना है। इसलिए शिर्क के साधनों से बचना ज़रूरी है।
- क़ब्र के पास उनको सम्मान देने और उनके पास इबादत करने के लिए जाना जायज़ नहीं है, चाहे उनके अंदर दफ़न इन्सान अल्लाह का कितना ही क़रीबी क्यों न हो।
- क़ब्रों के ऊपर मस्जिद बनाना हराम है।
- क़ब्रों के पास नमाज़ पढ़ना हराम है, चाहे वहाँ मस्जिद न भी बनाई जाए। हाँ, जिसपर जनाज़े की नमाज़ न पढ़ी गई हो तो उसकी क़ब्र पर जनाज़े की नमाज़ पढ़न इस मनाही के दायरे से बाहर है,।
श्रेणियाँ :
इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह
· नमाज़
· अक़ीदा
· फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह
· अल्लाह के नाम और उनसे संबंधित अहकाम
· मस्जिदों के आदाब
· शिर्क (बहुदेववाद)
بسم الله الرحمن الرحيم
मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
سبحان الله وبحمده
अल्लाह की महिमा और स्तुति है