क्या ऐसा नहीं है कि वे अल्लाह की हलाल की हुई वस्तुओं को हराम ठहराते हैं, तो तुम उन्हें हरा…
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हदीस वर्णनकर्ता: इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है।
सह़ीह़
27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
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हदीस का पाठ: क्या ऐसा नहीं है कि वे अल्लाह की हलाल की हुई वस्तुओं को…
عن عدي بن حاتم رضي الله عنه : "أنه سمع النبي صلى الله عليه وسلم يقرأ هذه الآية: "اتَّخَذُوا أَحْبَارَهُمْ وَرُهْبَانَهُمْ أَرْبَابًا مِنْ دُونِ اللَّهِ وَالْمَسِيحَ ابْنَ مَرْيَمَ وَمَا أُمِرُوا إِلاَّ لِيَعْبُدُوا إِلَهًا وَاحِدًا لا إِلَهَ إِلاَّ هُوَ سُبْحَانَهُ عَمَّا يُشْرِكُونَ" فقلت له: إنا لسنا نعبدهم، قال: أليس يُحَرِّمُونَ ما أحل الله فتُحَرِّمُونَهُ؟ ويُحِلُّونَ ما حَرَّمَ الله فتُحِلُّونَهُ؟ فقلت: بلى، قال: فتلك عبادتهم".
हदीस की व्याख्या: क्या ऐसा नहीं है कि वे अल्लाह की हलाल की हुई वस्तुओं को…
जब इस सम्मानित सहाबी ने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को यह आयत पढ़ते सुना, जिसमें यहूदियों और ईसाइयों के बारे में कहा गया है कि उन्होंने अपने धर्म गुरुओं और सन्यासियों को उपास्य बना लिया और यह अधिकार दे दिया कि अल्लाह के आदेश-निषेध के विरुद्ध अपने आदेश-निषेध जारी करें, तो उन्हें उसका अर्थ समझने में कठिनाई हुई, क्योंकि वह समझते थे कि इबादत केवल सजदा आदि ही का नाम है। अतः, रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने स्पष्ट कर दिया कि धर्म गुरुओं और पादरियों की इबादत का एक रूप यह भी है कि अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के आदेश के विरुद्ध, उनकी हराम की हुई हलाल चीज़ को हराम मान लिया जाए और उनकी हलाल की हुई हराम चीज़ को हलाल मान लिया जाए।
सीख: क्या ऐसा नहीं है कि वे अल्लाह की हलाल की हुई वस्तुओं को…
- उलेमा और दूसरी किसी सृष्टि का अल्लाह के आदेशों को बदलने में अनुसरण करना, यदि अनुसरणकर्ता को मालूम हो कि वे अल्लाह की शरीयत का स्पष्ट विरोध कर रहे हैं, महाशिर्क है।
- किसी चीज को हलाल या हराम करार देने का अधिकार केवल अल्लाह को प्राप्त है।
- इसमें शिर्क की बहुत सारी किस्मों में से एक किस्म यानी अनुसरण में शिर्क का बयान हुआ है।
- इससे पता चलता है कि अज्ञान को ज्ञान देना, धर्म सम्मत है।
- यह भी मालूम होता है कि इबादत के मायने बहुत ही व्यापक हैं। इसमें हर वह निहित एवं विदित कथन तथा काम शामिल है, जिसे अल्लाह पसंद करता है और जिससे वह खुश होता है।
- इसमें पादरियों और सन्यासियों की गुमराही का बयान हुआ है।
- यहूदियों और ईसाइयों के शिर्क को साबित किया गया है।
- बताया गया है कि समस्त रसूलों का मूल धर्म एक ही है और वह है एकेश्वरवाद।
- रचयिता की अवज्ञा करते हुए, किसी सृष्टि की आज्ञा का पालन करना दरअसल उसकी इबादत करना है।
- बताया गया है कि यदि किसी धर्म संबंधी बात का भाव समझ में न आए, तो ज्ञानियों से पूछ कर मालूम कर लेना अनिवार्य है।
- इससे सहाबियों का ज्ञान से असीम प्रेम मालूम होता है।
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मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
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