जब तुम में से कोई अपने भाई को मारे, तो चेहरे पर मारने से बचे।

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: जब तुम में से कोई अपने भाई को मारे, तो चेहरे पर मारने स…

عن أبي هريرة، قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «إذا ضَرَبَ أَحَدُكُمْ أخاه فَلْيَجْتَنِب الوجْهَ».

हदीस की व्याख्या: जब तुम में से कोई अपने भाई को मारे, तो चेहरे पर मारने स…

इस हदीस का अर्थ यह है कि जब तुममें से कोई किसी को शिष्ट बनाने, दंड देने, हद लागू करने या किसी झगड़े आदि के कारण मारे, तो चेहरे पर न मारे और इससे हर हाल में बचे। चाहे मामला शरई हद लागू करने ही का क्यों न हो। क्योंकि इन्सान का चेहरा उसके शरीर का सबसे प्रतिष्ठित अंग है और उसी से इन्सान किसी से आमने-सामने होता है। उसपर मारने से उसका कोई अंग नष्ट भी हो सकता है अथवा उसे कोई भी नुक़सान हो सकता है। इसलिए उसपर मारने से बचना ज़रूरी है। चेहरे पर मारना हराम है, चाहे मारना अपने आप में सही हो या ग़लत।

श्रेणियाँ : शरई आदाब · विरोध करने के आदाब · अल्लाह की ओर बुलाना · इस्लाम में मानव के अधिकार · फ़ज़ीलतें तथा आदाब · आह्वान एवं भलाई का आदेश देने तथा बुराई से रोकने का प्रबंध करना

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سبحان الله وبحمده अल्लाह की महिमा और स्तुति है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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