तुममें से किसी व्यक्ति को लोगों का भय हक़ बात बोलने से हरगिज़ न रोके, जब वह उसे देख रहा हो…
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हदीस वर्णनकर्ता: इसे तिर्मिज़ी, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है
स़ह़ीह़
27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
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हदीस का पाठ: तुममें से किसी व्यक्ति को लोगों का भय हक़ बात बोलने से…
हदीस की व्याख्या: तुममें से किसी व्यक्ति को लोगों का भय हक़ बात बोलने से…
अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अपने सहाबा को संबोधित किया और इस दौरान एक बात ताकीद के साथ यह कही कि किसी मुसलमान को लोगों का भय और उनका प्रभाव हक़ बोलने या उसका आदेश देने से न रोके, जब वह उसे देख रहा हो या जानता हो।
सीख: तुममें से किसी व्यक्ति को लोगों का भय हक़ बात बोलने से…
- इस हदीस में इस बात की प्रेरणा दी गई है कि लोगों के भय से हक़ बात को छोड़ा न जाए तथा उसे छुपाया न जाए।
- हक़ बात बोलने का मतलब यह नहीं है कि बोलने का अंदाज़ शालीन न हो, हिकमत से काम न लिया जाए और अपनी बात अच्छे से न रखी जाए।
- ग़लत चीज़ का खंडन करना और अल्लाह का हक़ जब बंदों के हितों से टकराता हो, तो अल्लाह के हक़ को आगे रखना अनिवार्य है।
श्रेणियाँ :
भलाई का आदेश देना तथा बुराई से रोकना
· भलाई का आदेश देने तथा बुराई से रोकने का हुक्म
· आह्वान एवं भलाई का आदेश देने तथा बुराई से रोकने का प्रबंध करना
بسم الله الرحمن الرحيم
बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
الأربعاء 16 جمادى الأولى
سبحان الله
अल्लाह की पवित्रता है