“क़ब्रों पर मत बैठो और उनकी ओर मुँह करके नमाज़ न पढ़ो।”
इस्लाम > Hi > हदीस > अकद > “क़ब्रों पर मत बैठो और उनकी ओर मुँह करके नमाज़ न पढ़ो।”
हदीस वर्णनकर्ता: इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
स़ह़ीह़
27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समय
हदीस का पाठ: “क़ब्रों पर मत बैठो और उनकी ओर मुँह करके नमाज़ न पढ़ो।”
عن أبي مَرْثَدٍ الغَنَوِيّ رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «لَا تَجْلِسُوا عَلَى الْقُبُورِ، وَلَا تُصَلُّوا إِلَيْهَا».
हदीस की व्याख्या: “क़ब्रों पर मत बैठो और उनकी ओर मुँह करके नमाज़ न पढ़ो।”
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने क़ब्रों पर बैठने से मना किया है।
इसी तरह उनकी ओर मुँह करके इस तरह नमाज़ पढ़ने से भी मना किया है कि क़ब्र नमाज़ी के क़िबले की दिशा में हो। मना करने का कारण यह है कि यह चीज़ शिर्क की ओर ले जाने वाली चीज़ है।
सीख: “क़ब्रों पर मत बैठो और उनकी ओर मुँह करके नमाज़ न पढ़ो।”
- क़ब्रिस्तान में, क़ब्रों के बीच या क़ब्रों की ओर मुँह करके नमाज़ पढ़ने की मनाही। परंतु जनाज़े की नमाज़ इस मनाही के दायरे से बाहर है, जैसा कि सुन्नत से साबित है।
- क़ब्रों की ओर मुँह करके नमाज़ पढ़ने से मना शिर्क का द्वार बंद करने के लिए किया गया है।
- इस्लाम ने क़ब्रों के बारे में अतिशयोक्ति से भी मना किया है तथा उनके असम्मान करने से भी मना किया है। यहाँ न तो हद से आगे बढ़ने की अनुमति है और न कोताही करने की।
- मुसलमान का सम्मान उसकी मौत के बाद भी बाक़ी रहता है। क्योंकि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "मरे हुए व्यक्ति की हड्डी तोड़ना जीवित व्यक्ति की हड्डी तोड़ने के समान है।"
श्रेणियाँ :
इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह
· नमाज़
· अक़ीदा
· फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह
· नमाज़ की शर्तें
· सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह पर ईमान
· उपासना (इबादत) से संबंधित एकेश्वरवाद
بسم الله الرحمن الرحيم
मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
سبحان الله وبحمده
अल्लाह की महिमा और स्तुति है