हमें जनाज़े के पीछे चलने से मना किया गया है, लेकिन इस मामले में हमपर सख़्ती नहीं बरती गई ह…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: हमें जनाज़े के पीछे चलने से मना किया गया है, लेकिन इस म…

हदीस की व्याख्या: हमें जनाज़े के पीछे चलने से मना किया गया है, लेकिन इस म…

उम्मे अतिय्या अंसारी एक वरिष्ठ सहाबिया हैं। उनका कहना है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने स्त्रियों को जनाज़े के साथ चलने से मना किया है। इसका कारण यह है कि उनका दिल बड़ा नर्म होता है। उनके पास पुरुषों जैसा धैर्य और सहन शक्ति नहीं होती। अतः, उनके निकलने से रोने-धोने और फ़ितने का डर रहता है। परंतु, इसके बावजूद उन्होंने क़रीनों से यह समझा है कि यह मनाही ताकीद वाली नहीं है और इससे उसका हराम होना साबित नहीं होता। लेकिन सही यह है कि स्त्रियाँ जनाज़े के पीछे चल नहीं सकतीं। इब्ने दक़ीक़ अल-ईद कहते हैंः स्त्रियों के जनाज़े के पीछे चलने से मनाही के बारे में कई हदीसें मौजूद हैं, जो इस हदीस से अधिक सख़्ती पर दलालत करती हैं।

श्रेणियाँ : इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह · उसूल-ए-फ़िक़्ह · जनाज़े · शब्दों का अर्थों से संबंध तथा अहकाम एवं मसायल निकालने का तरीक़ा · फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह · क़ब्रों की ज़ियारत

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سبحان الله وبحمده अल्लाह की महिमा और स्तुति है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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