अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपने कमरे के द्वार पर झगड़ने वालों की आवाज़ स…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपने कमरे…

عن أُمُّ سَلَمَة رضي الله عنها أن رسول الله صلى الله عليه وسلم سَمِعَ جَلَبَةَ خَصْمٍ بِبَابِ حُجْرَتِهِ، فَخَرَجَ إلَيْهِمْ، فقال: «ألا إنما أنا بشر، وإنما يأتيني الخصم، فلعل بعضكم أن يكون أبلغ من بعض؛ فَأَحْسِبُ أَنَّهُ صَادِقٌ؛ فَأَقْضِي لَهُ، فمن قضيت له بحق مسلم فإنما هي قطعة من نار، فَلْيَحْمِلْهَا أَوْ يَذَرْهَا».

हदीस की व्याख्या: अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपने कमरे…

नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने अपने कमरे के द्वार पर कुछ लोगों का शोर और कोलाहल सुना, जो आपस में झगड़ रहे थे। अतः झगड़े का निपटारा करने के लिए बाहर आए और फ़रमाया : देखो, मैं भी तुम्हारी ही तरह एक इनसान हूँ। न तो मुझे परोक्ष का ज्ञान है और न मुझे गुप्त बातें बताई जाती हैं कि जान सकूँ कि कौन सच्चा है और कौन झूठा। मेरे पास लोग, अपने झगड़ों के निपटारे के लिए आते हैं और मेरा फ़ैसला दोनों पक्षों के प्रमाणों और क़समों पर आधारित होता है। ऐसे में संभव है कि तुममें से कोई अन्य की तुलना में स्पष्टता से बात रखने की क्षमता अधिक रखता हो और मैं उसे सच्चा समझकर उसी के हक़ में निर्णय कर दूँ, जबकि वास्तविक मामला कुछ और हो। अतः, जान लो कि मेरा निर्णय केवल ज़ाहिरी मामलों में होता है, बातिनी मामलों में नहीं और मेरा फ़ैसला कदापि किसी हराम को हलाल नहीं करता। इसलिए, जिसे मैं किसी दूसरे का अधिकार दे दूँ और उसे पता हो कि वह उसका अधिकार नहीं है, तो उसे मैं आग का एक टुकड़ा निकालकर दे रहा हूँ। अब यदि चाहे, तो उसे ल जाए और चाहे तो छोड़ दे। यानी किसी का अधिकार हड़पने का अंजाम स्वयं हड़ने वाले को भुगतना पड़ेगा और अल्लाह अत्याचारियों के घात में है।

श्रेणियाँ : क़ज़ा (कोई शरई हुक्म, उसपर अमल करने की अनिवार्यता के साथ, बताना) · दावे तथा प्रमाण · फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह

بسم الله الرحمن الرحيم बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
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أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 16.6 / 29.5
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13 दिनों में अमावस्या
أستغفر الله मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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