इस्लाम > Hi > हदीस > फकह तथ उसल ए फकह > नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्ल्म- ने तीन दिरहम कीमत वाली ढाल चोरी करने के जुर्म में हाथ काटा…
सह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयعبدُ الله بنُ عمر رضي اللهُ عنهما «أَنَّ النَّبِي صلى الله عليه وسلم قَطَع فِي مِجَنٍّ قِيمَتُهُ -وَفِي لَفْظٍ: ثَمَنُهُ- ثَلاثَةُ دَرَاهِمَ».
अल्लाह ने मुसलमानों के लहू उनकी इज़्ज़त और धन की रक्षा प्रत्येक उन माध्यमों से की है, जो उपद्रवी को रोक सके। इसी कारण उस ने चोर -जो छिपा कर हिफ़ाज़त से रखे हुए धन चुराए- का दंड रखा है कि उसका वह अंग काट लिया जाए, जिस से उस ने चोरी की, ताकि यह उसके पाप का कफ़्फ़ारा हो और सवंय वह तथा दूसरे लोग भी गलत तरीक़ों से बाज़ आ जाएं और उचित एवं वैध तरीके से कमाएं। तो काम भी अधिक होगा तथा लाभ भी अधिक होगा, इस तरह दुनिया भी आबाद होगी और लोग भी सम्मानित होंगे।
अल्लाह की हिकमत है कि उस ने चोरी के कारण हाथ काटे जाने का निसाब तीन दिरहम अर्थात सोने के एक दीनार का चतुर्थांश रखा है, ताकि मुसलमानों के माल और उनका जीवन सुरक्षित रहे और शांति क़ायम रहे और लोग अपने धनों को कमाने तथा बढ़ाने में इस्तेमाल करें।
यह एक ग्राम और एक ग्राम के सोलहवें हिस्से (1.0625) के समान है, क्योंकि एक दीनार 4.25 ग्राम का होता है।
श्रेणियाँ : हुदूद (शरई दंड) · चोरी की हद (दंड) · फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह