जब तुममें से किसी की पत्नी उससे मस्जिद जाने की अनुमति माँगे, तो वह उसे न रोके।

इस्लाम > Hi > हदीस > फकह तथ उसल ए फकह > जब तुममें से किसी की पत्नी उससे मस्जिद जाने की अनुमति माँगे, तो वह उसे न रोके।

हदीस वर्णनकर्ता: इसे दोनों रिवायतों के साथ बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

📖 2 मिनट पढ़ने का समय

हदीस का पाठ: जब तुममें से किसी की पत्नी उससे मस्जिद जाने की अनुमति म…

عن عبد الله بن عمر رضي الله عنهما عَنِ النَّبيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «إذا اسْتَأذَنَت أَحَدَكُم امرَأَتُه إلى المسجِد فَلا يَمنَعهَا، قال: فقال بلال بن عبد الله: والله لَنَمنَعُهُنَّ، قال: فَأَقبَلَ عليه عبد الله، فَسَبَّهُ سَبًّا سَيِّئًا، ما سَمِعتُه سَبَّهُ مِثلَهُ قَطُّ، وقال: أُخبِرُك عن رسول الله صلى الله عليه وسلم وتقول: والله لَنَمنَعُهُنَّ؟».
وفي لفظ: «لا تَمنَعُوا إِمَاء الله مسَاجِد الله...».

हदीस की व्याख्या: जब तुममें से किसी की पत्नी उससे मस्जिद जाने की अनुमति म…

अबदुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अंहुमा) ने एक हदीस सुनाई कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया है कि यदि किसी की पत्नी उससे मस्जिद जाने की अनुमति माँगे, तो उसे न रोके; ताकि वह मस्जिद में जमाअत के साथ नमाज़ पढ़ने की फज़ीलत से वंचित न हो। इससे पता चलता है कि महिला का मस्जिद जाना जायज़ है। अबदुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अंहुमा) ने जब यह हदीस सुनाई, तो उस समय वहाँ उनका एक बेटा उपस्थित था। उन्हें लग रहा था अब हालात नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के समय जैसे नहीं रहे और स्त्रियों ने पहले की तुलना में अधिक बनाव-सिंगार शुरू कर दिया है। अतः, स्त्रियों की सुरक्षा के जज़्बे से ओत-प्रोत होकर कह उठे कि अल्लाह की क़सम, हम उन्हें ज़रूर रोकेंगे। (ज्ञात हो कि उनका उद्देश्य अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की बात पर आपत्ति करना नहीं था।) लेकिन, उनके इस रवैये से उनके पिता यह समझ बैठे कि वह अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की हदीस पर आपत्ति जता रहे हैं। इसलिए अल्लाह और उसके रसूल के विरोध के क्रोध से प्रभावित होकर उन्होंने अपने बेटे को बहुत ज़्यादा बुरा-भला कहा और फ़रमायाः मैं तुम्हें अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की हदीस सुना रहा हूँ और तुम कहते हो कि अल्लाह की क़सम, हम उन्हें अवश्य रोकेंगे?

श्रेणियाँ : इबादतों पर आधारित फ़िक़्ह · परिवार से संबंधित फ़िक़्ह · नमाज़ · स्त्रियों से संबंधित अहकाम · फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह · जमात से पढ़ी जाने वाली नमाज़ की फ़ज़ीलत तथा अहकाम

بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
بدر पूर्णिमा दिन 16.5 / 29.5
रोशनी 97%
13 दिनों में अमावस्या
لا حول ولا قوة إلا بالله अल्लाह के बिना कोई शक्ति और सामर्थ्य नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद