बंदों पर अल्लाह का अधिकार यह है कि बंदे उसकी इबादत करें और किसी को उसका साझी न बनाएँ। जबकि…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है

स़ह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: बंदों पर अल्लाह का अधिकार यह है कि बंदे उसकी इबादत करें…

عَنْ مُعَاذٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ، قَالَ: كُنْتُ رِدْفَ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى حِمَارٍ يُقَالُ لَهُ عُفَيْرٌ، فَقَالَ: «يَا مُعَاذُ، هَلْ تَدْرِي حَقَّ اللَّهِ عَلَى عِبَادِهِ، وَمَا حَقُّ العِبَادِ عَلَى اللَّهِ؟»، قُلْتُ: اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَعْلَمُ، قَالَ: «فَإِنَّ حَقَّ اللَّهِ عَلَى العِبَادِ أَنْ يَعْبُدُوهُ وَلا يُشْرِكُوا بِهِ شَيْئًا، وَحَقَّ العِبَادِ عَلَى اللَّهِ أَنْ لا يُعَذِّبَ مَنْ لا يُشْرِكُ بِهِ شَيْئًا»، فَقُلْتُ: يَا رَسُولَ اللَّهِ أَفَلاَ أُبَشِّرُ بِهِ النَّاسَ؟ قَالَ: «لا تُبَشِّرْهُمْ، فَيَتَّكِلُوا».

हदीस की व्याख्या: बंदों पर अल्लाह का अधिकार यह है कि बंदे उसकी इबादत करें…

इस हदीस में अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि बंदों पर अल्लाह का क्या अधिकार है और अल्लाह पर बंदों का क्या अधिकार है। आपने बताया कि बंदों पर अल्लाह का अधिकार यह है कि बंदे अकेले उसी की इबादत करें और किसी को उसका साझी न बनाएँ। जबकि अल्लाह पर बंदों का अधिकार यह है कि अल्लाह ऐसे एकेश्वरवादी लोगों को अज़ाब न दे, जो किसी को उसका साझी न बनाते हों। यह सुन मुआज़ रज़ियल्लाह अनहु ने कहा कि ऐ अल्लाह के रसूल! क्या मैं लोगों को यह सुसमाचार सुना न दूँ, ताकि वे अल्लाह के इस अनुग्रह पर खुश हो जाएँ? चुनांचे अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इस भय के देखते हुए उनको ऐसा करने से मना कर दिया कि कहीं लोग इसी पर भरोसा करके बैठ न जाएँ।

सीख: बंदों पर अल्लाह का अधिकार यह है कि बंदे उसकी इबादत करें…

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بسم الله الرحمن الرحيم मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
بدر पूर्णिमा दिन 16.6 / 29.5
रोशनी 96%
13 दिनों में अमावस्या
لا إله إلا الله अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद