अगर लोगों को उनके दावों के आधार पर दे दिया जाए तो कुछ लोग, लोगों की जान और माल तक का दावा …
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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बैहक़ी आदि ने रिवायत किया है, तथा इसका कुछ भाग स़ह़ीह़ैन (स़ह़ीह़ बुख़ारी और स़ह़ीह़ मुस्लिम) में भी है।
ह़सन
27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
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हदीस का पाठ: अगर लोगों को उनके दावों के आधार पर दे दिया जाए तो कुछ ल…
عَن ابنِ عباسٍ رضي الله عنهما أنَّ رسولَ اللهِ صلي الله عليه وسلم قال: «لَو يُعطَى النّاسُ بدَعواهُم لادَّعَى رِجالٌ أموالَ قَومٍ ودِماءَهُم، لَكِنَّ البَيِّنَةَ على المُدَّعِى، واليَمينَ على مَن أنكَرَ».
हदीस की व्याख्या: अगर लोगों को उनके दावों के आधार पर दे दिया जाए तो कुछ ल…
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया है कि अगर लोगों को प्रमाणों की पड़ताल किए बिना केवल उनके दावे के आधार पर दे दिया जाने लगे, तो कुछ लोग लोगों के धन एवं जान तक का दावा करने लगें। इसलिए मुद्दई को अपने दावे की दलील प्रस्तुत करनी होगी। अगर उसके पास दलील न हो, तो दावे को प्रतिवादी के सामने रखा जाएगा। अगर उसने इनकार कर दिया, तो उसे क़सम खानी होगी। उसके बाद वह बरी हो जाएगा।
सीख: अगर लोगों को उनके दावों के आधार पर दे दिया जाए तो कुछ ल…
- इब्न-ए-दक़ीक़ अल-ईद कहते हैं : यह हदीस इस्लामी विधानों के एक बुनियादी सिद्धांत और मतभेद के समय एक महान संदर्भ की हैसियत रखती है।
- इस्लामी शरीयत का एक बुनियादी उद्देश्य जान व माल के साथ खिलवाड़ की राह बंद करना एवं जान व माल को सुरक्षा प्रदान करना है।
- क़ाज़ी अपने ज्ञान की रोशनी में नहीं, बल्कि प्रमाणों के आलोक में निर्णय देगा।
- जो कोई भी बिना सबूत के दावा करेगा, उसे अस्वीकार कर दिया जाएगा।। दावा का संबंध चाहे अधिकारों एवं मामलात से हो या ईमान एवं इल्म के मसायल से।
श्रेणियाँ :
क़ज़ा (कोई शरई हुक्म, उसपर अमल करने की अनिवार्यता के साथ, बताना)
· दावे तथा प्रमाण
· फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह
بسم الله الرحمن الرحيم
मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
سبحان الله وبحمده
अल्लाह की महिमा और स्तुति है