इस्लाम > Hi > हदीस > इबदत पर आधरत फकह > बेशक बंदा नमाज़ पढ़ता है, लेकिन उसके लिए उसमें से केवल दसवाँ, नौवाँ, आठवाँ, सातवाँ, छठा, प…
ह़सन27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयअम्मार बिन यासिर रज़ियल्लाहु अन्हुमा मस्जिद में दाख़िल हुए और नफ़ल नमाज़ पढ़ी। यह एक हल्की नमाज़ थी। जब वह मस्जिद से निकले, तो अब्दुल्लाह बिन अ'न'मह उनके पीछे चले और उनसे कहा : ऐ अबू यक़ज़ान! मैंने देखा कि आपने नमाज़ बहुत हल्की पढ़ी है! अम्मार ने कहा : क्या तुमने मुझे उसके अरकान (स्तंभों), वाजिबात (अनिवार्य कार्यों) या शर्तों में कोई कमी करते हुए देखा?! उसने कहा : नहीं। तो अम्मार रज़ियल्लाहु अन्हु ने कहा : मैंने उसे इसलिए संक्षिप्त कर दिया, ताकि शैतान मुझे विचलित न कर दे। मैंने अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कहते हुए सुना है : ''बंदा नमाज़ पढ़ता है, लेकिन उसके लिए उसके प्रतिफल का केवल दसवाँ, नौवाँ, आठवाँ, सातवाँ, छठा, पाँचवाँ, चौथा, तीसरा या आधा हिस्सा ही लिखा जाता है।''
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