अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने शिग़ार विवाह से मना किया है। (शिग़ार विवाह यह…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।

सह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने शिग़ार विव…

عن عبد الله بن عمر رضي الله عنهما : «أن رسول الله صلى الله عليه وسلم نهى عن الشِّغَارِ».

हदीस की व्याख्या: अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने शिग़ार विव…

निकाह के अनुबंध में असल यह है कि स्त्री को अपने नफ़्स के बदले महर मिलना चाहिए और इसके बिना यह अनुबंध संपन्न नहीं होगा।

यही कारण है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने जाहिलियत काल में प्रचलित इस निकाह से मना किया है, जिसमें अभिभावकगण अपने मातहत स्त्रियों पर अत्याचार करते थे। क्योंकि वे उनका निकाह बिना महर के, केवल अपनी अभिलाषाओं तथा वासनाओं को सामने रखते हुए कर देते थे। वे उनका विवाह इस शर्त पर कर देते थे कि उनसे विवाह करने वाले भी अपने मातह स्त्रियों का निकाह उनसे बिना महर के कर देंगे।

यह सरासर अत्याचार और स्त्रियों के साथ अल्लाह की उतारी हुई शरीयत की अनदेखी करते हुए किया जाने वाला व्यवहार है। इसलिए यह हराम और अमान्य है।

श्रेणियाँ : परिवार से संबंधित फ़िक़्ह · निकाह · फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह · निकाह की वह सूरतें, जो हराम हैं

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12 दिनों में अमावस्या
الحمد لله अल्लाह की सारी प्रशंसा है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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