ऐ अल्लाह! मैं तुझसे मार्गदर्शन, धर्मनिष्ठा, पवित्राचार और बेनियाज़ी (निस्पृहता) माँगता हूँ…
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हदीस वर्णनकर्ता: इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
स़ह़ीह़
27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
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हदीस का पाठ: ऐ अल्लाह! मैं तुझसे मार्गदर्शन, धर्मनिष्ठा, पवित्राचार…
हदीस की व्याख्या: ऐ अल्लाह! मैं तुझसे मार्गदर्शन, धर्मनिष्ठा, पवित्राचार…
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जो दुआएँ किया करते थे, उनमें से एक दुआ यह है : «अल्लाहुम्मा इन्नी असअलुकल हुदा» यानी ऐ अल्लाह! मैं तुझसे सीधा रास्ता यानी सत्य की पहचान और उसपर अमल करने का सुयोग, «वत-तुक़ा» आदेशों तथा निषेधों के अनुपालन का जज़्बा, «वल-अफ़ाफ़» अवैध एवं अनुचित बातों तथा कार्यों से बचने की शक्ति, «वल-ग़िना» और सृष्टियों से निस्पृहता की दुआ करता हूँ, कि तेरे द्वार के अतिरिक्त किसी और के द्वार पर जाने की आवश्यकता न हो।
सीख: ऐ अल्लाह! मैं तुझसे मार्गदर्शन, धर्मनिष्ठा, पवित्राचार…
- मार्गदर्शन, धर्मपरायणता, पवित्रता और निस्वार्थता की फ़ज़ीलत, और उनसे सुशोभित होने के लिए प्रोत्साहन।
- अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि अपने लिए किसी लाभ एवं हानि के मालिक नहीं थे। लाभ एवं हानि का मालिक बस अल्लाह है।
- लाभ, हानि तथा मार्गदर्शन का मालिक बस अल्लाह है। न कोई निकटवर्ती फ़रिश्ता, न अल्लाह का भेजा हुआ कोई रसूल।
श्रेणियाँ :
दुआओं तथा अज़कार पर आधारित फ़िक़्ह
· मासूर दुआएँ
· फ़ज़ीलतें तथा आदाब
بسم الله الرحمن الرحيم
मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
سبحان الله
अल्लाह की पवित्रता है