इस्लाम > Hi > हदीस > फजलत तथ आदब > “जिसने दस बार 'ला इलाहा इल्लल्लाहु वह़दहु ला शरीका लहु, लहुल-मुल्कु व लहुल-हम्दु, व हुवा अ…
स़ह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयعن أبي أيوب رضي الله عنه عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «مَنْ قَالَ: لَا إِلَهَ إِلَّا اللهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ، عَشْرَ مِرَارٍ كَانَ كَمَنْ أَعْتَقَ أَرْبَعَةَ أَنْفُسٍ مِنْ وَلَدِ إِسْمَاعِيلَ».
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि जिसने इस ज़िक्र को दिन में दस बार पढ़ा : "ला इलाहा इल्लल्लाहु वह़दहु ला शरीका लहु, लहुल-मुल्कु व लहुल-हम्दु, व हुवा अला कुल्लि शैइन क़दीर।" यानी अल्लाह को छोड़कर कोई सच्चा पूज्य नहीं है। वह अकेला है। उसका कोई साझी नहीं है। उसी के पास संपूर्ण राज्य है। केवल वही प्रेम तथा सम्मान के साथ प्रशंसा का हक़दार है। उसके सिवा कोई इस बात का हक़दार नहीं है। वह बड़ा क्षमतावान है। उसे कोई विवश नहीं कर सकता। जिसने इस ज़िक्र को दिन में दस बार पढ़ा, उसे उस व्यक्ति के समान सवाब मिलेगा, जिसने इसमाईल बिन इबराहीम अलैहिमस्सलाम की नस्ल के दस दासों को मुक्त किया हो। यहाँ विशेष रूप से इसमाईल अलैहिस्सलाम की नस्ल का उल्लेख इसलिए किया गया है कि उनकी नस्ल के लोग अन्य लोगों से श्रेष्ठ हैं।
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