इस्लाम > Hi > हदीस > आहवन एव भलई क आदश दन तथ बरई स रकन क परबध करन > मुझे याद आया कि हमारे पास सोने का एक टुकड़ा रखा हुआ है। अतः, मुझे यह अच्छा नहीं लगा कि मेर…
सह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयعن عقبة بن الحارث رضي الله عنه قال: صليت وراء النبي صلى الله عليه وسلم بالمدينة العصر، فسَلَّمَ ثم قام مُسرعًا، فتَخَطَّى رِقَابَ الناس إلى بعض حُجَرِ نِسائه، فَفَزِعَ الناسُ من سُرْعَتِهِ، فخرج عليهم، فرأى أنهم قد عجبوا من سُرْعَتِهِ، قال: «ذكرت شيئاً من تِبْرٍ عندنا فكرهت أن يَحْبِسَنِي، فأمرتُ بِقِسْمَتِهِ».
وفي رواية: «كنت خَلَّفْتُ في البيت تِبْرًا من الصدقة، فكرهت أن أُبَيِّتَهُ».
श्रेणियाँ : शरई राजनीति · इमाम (शासनाध्यक्ष) के उत्तरदायित्व · सीरत-ए-नबवी · अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के गुण तथा आचरण · आह्वान एवं भलाई का आदेश देने तथा बुराई से रोकने का प्रबंध करना · आचरण संबंधी विशेषताएँ · आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का दुनिया के माया-मोह से मुक्त होना · सीरत एवं इतिहास