वह क़ौम कदापि सफल नहीं होगी, जिसने अपने मामले किसी औरत को सौंप दिए हों।
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हदीस वर्णनकर्ता: इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
स़ह़ीह़
27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
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हदीस का पाठ: वह क़ौम कदापि सफल नहीं होगी, जिसने अपने मामले किसी औरत…
हदीस की व्याख्या: वह क़ौम कदापि सफल नहीं होगी, जिसने अपने मामले किसी औरत…
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बता रहे हैं कि वह क़ौम कभी सफलता नहीं पाएगी, जिसने न्याय, सामान्य शासन या मंत्रालय जैसे अपने मामले किसी औरत को सौंप दिए हों।
सीख: वह क़ौम कदापि सफल नहीं होगी, जिसने अपने मामले किसी औरत…
- महिलाएँ शासन, लोगों के बीच न्याय और इस तरह के अन्य सार्वजनिक पद नहीं संभालेंगी, अलबत्ता निजी मामलों, जैसे किसी वक़्फ़ या अनाथों की संरक्षकता, या किसी मदरसे का प्रबंधन और इस तरह के अन्य कार्य संभालने में कोई हर्ज नहीं हैै।
- स्त्री की शारीरिक कमी और स्वाभाविक निर्बलता के कारण वह सार्वजनिक पदों में पुरुष की भागीदार नहीं हो सकती और उसका ऐसे पदों को संभालना असफलता का कारण बनता है।
- अल्लाह ने महिला की रचना की और उसे पुरुष की प्रकृति से भिन्न प्रकृति प्रदान की, अतः कुछ कार्य ऐसे हैं, जिन्हें महिला का करना उचित नहीं है; उसकी विशेष प्रकृति के कारण, और इसी प्रकार कुछ कार्य ऐसे हैं, जिन्हें पुरुष का करना उचित नहीं है; उसकी विशेष प्रकृति के कारण।
- नकारात्मक सफलता : शरीयत की भाषा में फ़लाह यानी सफलता का अर्थ दुनिया और आख़िरत की भलाई प्राप्त करना है। यहाँ यह याद रहे कि किसी राज्य की समृद्धि इस बात की द्योतक नहीं है कि वहाँ रहने वाले लोगों को अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त होगी ही। जो समुदाय अल्लाह की आज्ञाकारी न हो, वह सफल नहीं है, चाहे देखने में सांसारिक रूप से बेहतर से बेहतर स्थिति ही में क्यों न हो।
- इस हदीस में महिला के दर्जे को कम नहीं किया गया है, बल्कि यह उसकी क्षमताओं का सही और उचित दिशा-निर्देशन है।
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शरई राजनीति
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· आह्वान एवं भलाई का आदेश देने तथा बुराई से रोकने का प्रबंध करना
بسم الله الرحمن الرحيم
मंगल 15 जुमादा अल-अव्वल
الثلاثاء 15 جمادى الأولى
سبحان الله
अल्लाह की पवित्रता है