सीरत एवं इतिहास पर हदीसें

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«सीरत एवं इतिहास» पर 213 समझाई गई नबवी हदीसें: अरबी पाठ, अनुवाद, व्याख्या और सीख, प्रामाणिकता की डिग्री और स्रोतों के साथ।

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

सीरत एवं इतिहास पर हदीसों की सूची

सह़ीह़ मुझे उहुद युद्ध के अवसर पर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के सामने लाया गया। उस समय मेरी आयु चौदह साल थी। अतः, आपने मुझे अनुमति नहीं दी। सह़ीह़ मैंने किसी लंबे बाल वाले लाल जोड़ा पहने व्यक्ति को अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से सुंदर नहीं देखा स़ह़ीह़ अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जूता पहनना, कंघी करना, पवित्रता प्राप्त करना तथा अपने सभी कार्यों को दाएँ से करना पसंद करते थे। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का दायाँ हाथ पवित्रता प्राप्त करने और खाने के लिए था। जबकि बायाँ हाथ इस्तिंजा करने (पेशाब एवं शोच करने के बा सह़ीह़ जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और आपके सहाबा मक्का आए, तो बहुदेववादियों ने कहाः तुम्हारे यहाँ ऐसे लोग आ रहे हैं, जिन्हें यसरिब के बुखार सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मक्का में कदा की ओर से, बतहा की ऊँची घाटी से होते हुए दाखिल हुए और नीची घाटी से निकले सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्ल्ललाहु अलैहि व सल्लम) शौच के लिए जाते, तो मैं और मेरे जैसा एक और लड़का पानी का बरतन और एक छोटी-सी बरछी लेकर साथ हो जाते। तब आप उस सह़ीह़ मैं तेरे धर्म, तेरी अमानत और तेरे अंतिम कर्मों को अल्लाह के हवाले करता हूँ। स़ह़ीह़ मैंने कभी अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को इस तरह खिल-खिलाकर हँसते हुए नहीं देखा कि आपके गले का कौआ नज़र आने लगे। आप केवल मुस्कुराया करते थे स़ह़ीह़ मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से दस रकात सीखी हैं स़ह़ीह़ अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब रात में सोकर उठते, तो अपने मुँह को मिसवाक से रगड़कर साफ़ करते। स़ह़ीह़ क्या मैं तुम्हें दज्जाल के बारे में वह बात न बताऊँ, जो किसी नबी ने अपनी जाति को नहीं बताई? वह काना होगा और वह अपने साथ जन्नत और जहन्नम से मिलती-जुलती सह़ीह़ अगर बहरैन का धन आया, तो मैं तुम्हें इस तरह, इस तरह और इस तरह दूँगा। सह़ीह़ मैंने स्वप्न देखा कि मैं मिसवाक कर रहा हूँ। इतने में मेरे पास दो व्यक्ति आए। उनमें से एक दूसरे से बड़ा था। मैंने मिसवाक छोटे को दे दी, तो मुझसे कहा गय सह़ीह़ नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की पत्नियाँ आपके पास मौजूद थीं। इतने में फ़ातिमा- रज़ियल्लाहु अन्हा- चलती हुई आईं। उनके चलने का अंदाज़ अल्लाह के रसूल- स़ह़ीह़ अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं, अरबों का विनाश उस बुराई से होना है, जो निकट आ गई है। आज याजूज और माजूज की दीवार में इतना छेद हो गया है। स़ह़ीह़ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर्दानशीं अविवाहित लड़की से भी अधिक हया वाले थे। परन्तु, जब कोई ऐसी चीज़ देखते, जिसे नापसंद करते, तो हम उसे आप सह़ीह़ एक अल्लाह की इबादत करो, किसी चीज़ को उसका साझी न बनाओ तथा उन बातों को छोड़ दो जो तुम्हारे बाप-दादा कहते हैं। तथा हमें नमाज़ एवं सत्य का आदेश देते हैं। सह़ीह़ नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- एक सफर में थे। इशा की नमाज़ पढ़ी, तो एक रकअत में सूरा वत्-तीनि वज़्-ज़ैतून की तिलावत की। मैंने आपसे उत्तम आवाज़ अथवा उत सह़ीह़ उहुद के दिन एक आदमी ने नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से कहाः आप क्या कहते हैं कि अगर मैं शहीद हो गया, तो कहाँ रहूँगा? आपने कहाः "जन्नत में।" यह सुनकर स़ह़ीह़ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब नमाज़ पढ़ते, तो (सजदे की अवस्था में) अपने दोनों बाज़ुओं को इतना हटाकर रखते कि आपकी बगलों का उजलापन प्रकट हो सह़ीह़ अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- उमामा बिंत ज़ैनब (अपनी नातिन) को उठाए हुए नमाज़ पढ़ लेते थे। सह़ीह़ मैं इस मामले में कोई कोताही नहीं करूँगा कि तुम्हें वैसी ही नमाज़ पढ़ाऊँ, जैसी अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- हमें नमाज़ पढ़ाया करते थे। सह़ीह़ दरअसल, हमसे पहले किसी समुदाय के लिए ग़नीमत का धन हलाल नहीं किया गया था। फिर अल्लाह ने जब हमारी दुर्बलता तथा असमर्थता देखी, तो उसे हमारे लिए हलाल कर दि सह़ीह़ बेशक अल्लाह ही के लिए है, जो उसने ले लिया और उसी का है, जो उसने दिया। उसके समीप प्रत्येक वस्तु का समय निश्चित है। अतः अब तू सब्र कर तथा अल्लाह से प्रत सह़ीह़ राजा, जादूगर तथा राहिब के साथ लड़के की कहानी सह़ीह़ आज के बाद तेरे पिता को कोई बेचैनी नहीं होगी। स़ह़ीह़ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब छींकते, तो अपना हाथ या कपड़ा अपने मुँह पर रख लेते और अपनी आवाज़ धीमी (या नीची) रखते। ह़सन अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की बात इतनी स्पष्ट और दो-टूक होती कि हर सुनने वाला समझ जाता। सह़ीह़ अल्लाह ने मेरे लिए धरती को समेट दिया, तो मैंने उसके सूर्योदय के स्थानों और सूर्यास्त के स्थानों को देखा। निश्चय ही मुसलमानों का राज्य वहाँ तक पहुँचेगा स़ह़ीह़ यदि मुसलमानों पर -या : मेरी उम्मत पर- कठिन न होता, तो मैं उन्हें आदेश देता कि प्रत्येक नमाज़ के समय मिसवाक कर लिया करें। ह़सन मुझे तुम्हारे बारे में जिस वस्तु का भय सबसे अधिक है, वह है, छोटा शिर्का।" सहाबा ने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! छोटा शिर्क क्या है? आपने उत्तर दिया : "दिख स़ह़ीह़ अल्लाह की क़सम, अल्लाह तुम्हारे द्वारा यदि एक भी व्यक्ति को हिदायत दे दे, तो यह तुम्हारे लिए लाल ऊँटों से उत्तम है। सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) सवार होकर एवं पैदल चलकर क़ुबा जाते और वहाँ दो रकात नमाज़ पढ़ते थे। सह़ीह़ क्या तुम नहीं जानते कि इसलाम पहले के गुनाहों को ख़त्म कर देता है, हिजरत पहले के गुनाहों को ख़त्म कर देती है और हज पहले के गुनाहों को ख़त्म कर देता है? सह़ीह़ अल्लाह पर भरोसा रखने के अनिवार्य होने तथा इस बात का उल्लेख कि अल्लाह अपने नबियों तथा औलिया का ख़ास ख़याल रखता है। सह़ीह़ लेकिन मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के भेद को सामने लाना नहीं चाहता था। यदि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) उसे छोड़ देते, तो मैं स्वीक सह़ीह़ ऐ अल्लाह के रसूल, ऐसा लग रहा था कि मैं अस्र की नमाज़ नहीं पढ़ा सकूँगा, यहाँ तक सूरज डूबने लगा, तो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः अल्लाह की सह़ीह़ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब कोई बात कहते, तो तीन बार कहते, ताकि आपकी बात को ठीक से समझ लिया जाए और जब किसी समूह के पास जाते और उन्हें सलाम करते, स़ह़ीह़ मैं तथा अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जुंबी होते और एक ही बर्तन से स्नान कर लेते थे। मैं माहवारी में होती और आपके आदेश से लंगोटा बाँध लेती, सह़ीह़ मुझे याद आया कि हमारे पास सोने का एक टुकड़ा रखा हुआ है। अतः, मुझे यह अच्छा नहीं लगा कि मेरा ध्यान उसी में अटका रहे। सो, मैंने उसे बाँटने का आदेश दे दि सह़ीह़ अब्दुर रहमान बिन अबू बक्र सिद्दीक़- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के कमरे में दाख़िल हुए। उस समय मैंने आपको अपने सीने सह़ीह़ मैं अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आया। उस समय आप चमड़े से बने हुए लाल खेमें में थे। उनका कहना है कि इसी बीच बिलाल- रज़ियल्लाहु अन्हु सह़ीह़ अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इशा की नमाज़ में लेट किया तो उमर निकल कर आए और कहने लगेः ऐ अल्लाह के रसूल! महीलाऐँ एवं बच्चे सो गऐ हैँ।अतः सह़ीह़ इसने कार्य थोड़ा किया और प्रतिफल बड़ा प्रदान किया गया। सह़ीह़ उसे दे दो, क्योंकि तुम्हारे अंदर सबसे उत्तम व्यक्ति वह है, जो सबसे अच्छे तरीके से उधार चुकाने वाला हो सह़ीह़ अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब तबूक युद्ध से वापस आए, तो लोगों ने आपकी अगवानी की और मैंने बच्चों के साथ सनीयतुल वदा पर आपकी अगवानी की सह़ीह़ हमें दुनिया की वह सारी वस्तुएँ प्रदान की गईं, जो तुम देख रहे हो। हमें तो कभी-कभी भय लगता है कि कहीं हमारे अच्छे कर्मों का बदला दुनिया ही में न दे दिया सह़ीह़ हम अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ एक युद्ध में निकले। हम छह लोगों को सामूहिक रूप से एक ऊँट दिया गया था, जिसपर हम बारी-बारी सवार होते सह़ीह़ एक रात मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ नमाज़ पढ़ी जिसमें आपने सूरा बक़रा पढ़ना शुरू किया। सह़ीह़ अल्लाह मूसा पर दया करे, उन्हें इससे भी अधिक कष्ट दिया गया, परन्तु सब्र से काम लिया सह़ीह़ मुझे लगता है कि तुम लोगों ने अबू उबैदा के बहरैन से कुछ धन लेकर आने की बात सुनी है। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) किसी महीने में रोज़ा न रखते, यहाँ तक कि हम सोचने लगते कि इस महीने में रोज़ा रखेंगे ही नहीं और किसी महीने में सह़ीह़ ऐ साद बिन मुआज़! काबा के रब की क़सम, मुझे उहुद पर्वत के निकट से जन्नत की सुगंध आ रही है। सह़ीह़ कभी ऐसा नहीं हुआ कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से कुछ माँगा गया और आपने ना कह दी। सह़ीह़ अगर मैं अपने इन खुजूरों को खाने तक जीवित रहा तो यह बड़ा लंबा जीवन होगा। अतः, अपने पास मौजूद खुजूरों को फेंक दिया और मुश्रिकों से लड़ने लगे, यहाँ तक कि सह़ीह़ अबू बक्र से कहो कि लोगों को नमाज़ पढ़ाएँ। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को दूध पेश किया गया, जिसमें पानी मिला हुआ था। उस समय आपके दाएँ एक देहाती और बाएँ अबू बक्र- रज़ियल्लाहु अन्हु सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मक्का विजय के दिन काले रंग की पगड़ी बाँधकर दाख़िल हुए। सह़ीह़ अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) कोई पीने की वस्तु तीन साँस में पीते थे।
بسم الله الرحمن الرحيم बुध 16 जुमादा अल-अव्वल
الأربعاء 16 جمادى الأولى
أحدب متناقص घटता हुआ कूबड़ दिन 16.7 / 29.5
रोशनी 96%
13 दिनों में अमावस्या
الله أكبر अल्लाह सबसे महान है

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

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