“निस्संदेह, अल्लाह पवित्र है और केवल पवित्र चीज़ों को ही स्वीकार करता है। अल्लाह ने ईमान व…

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हदीस वर्णनकर्ता: इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है

स़ह़ीह़

27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया

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हदीस का पाठ: “निस्संदेह, अल्लाह पवित्र है और केवल पवित्र चीज़ों को ह…

عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رضي الله عنه قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «أَيُّهَا النَّاسُ، إِنَّ اللهَ طَيِّبٌ لَا يَقْبَلُ إِلَّا طَيِّبًا، وَإِنَّ اللهَ أَمَرَ الْمُؤْمِنِينَ بِمَا أَمَرَ بِهِ الْمُرْسَلِينَ، فَقَالَ: {يَا أَيُّهَا الرُّسُلُ كُلُوا مِنَ الطَّيِّبَاتِ وَاعْمَلُوا صَالِحًا، إِنِّي بِمَا تَعْمَلُونَ عَلِيمٌ} [المؤمنون: 51] وَقَالَ: {يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا كُلُوا مِنْ طَيِّبَاتِ مَا رَزَقْنَاكُمْ} [البقرة: 172] ثُمَّ ذَكَرَ الرَّجُلَ يُطِيلُ السَّفَرَ أَشْعَثَ أَغْبَرَ، يَمُدُّ يَدَيْهِ إِلَى السَّمَاءِ: يَا رَبِّ، يَا رَبِّ، وَمَطْعَمُهُ حَرَامٌ، وَمَشْرَبُهُ حَرَامٌ، وَمَلْبَسُهُ حَرَامٌ، وَغُذِيَ بِالْحَرَامِ، فَأَنَّى يُسْتَجَابُ لِذَلِكَ؟».

हदीस की व्याख्या: “निस्संदेह, अल्लाह पवित्र है और केवल पवित्र चीज़ों को ह…

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया कि अल्लाह पाक एवं पुनीत है, कमियों एवं दोषों से मुक्त तथा हर एतबार से परिपूर्ण है। वह केवल उन्हीं कार्यों, शब्दों और विश्वासों को स्वीकार करता है जो शुद्ध हों और जो केवल अल्लाह की प्रसन्नता के लिए और उसके पैगंबर के तरीक़े के अनुसार किए गए हों। अल्लाह की निकटता केवल इसी प्रकार की इबादतों के द्वारा प्राप्त किया जाना चाहिए। याद रखें कि अपने कर्मों को शुद्ध करने का सबसे महत्वपूर्ण साधन हलाल भोजन खाना है। हलाल भोजन खाने से व्यक्ति के कर्म शुद्ध होते हैं। इसीलिए जिस प्रकार अल्लाह ने रसूलों को हलाल भोजन खाने और अच्छे कर्म करने का आदेश दिया, उसी प्रकार उसने ईमान वालों को भी इसका आदेश दिया है। उसका कथन है : (ऐ रसूलो! हलाल चीज़ें खाओ और नेक अमल करो। निःसंदेह मैं वह सब जानता हूं जो तुम करते हो।) [सूरा मोमिनून : 51] एक अन्य स्थान में उसने कहा है : (ऐ ईमान वालो! हमारी दी हुई हलाल चीज़ें खाओ।) [सूरा बक़रा : 172]

फिर अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हराम भोजन करने से सावधान किया। क्योंकि हराम भोजन कर्म को नष्ट कर देता है और उसे अल्लाह के यहाँ क़बूल होने नहीं देता। चाहे क़बूल होने के ज़ाहिरी सबब जितने भी पाए जाएँ। मसलन :

1- किसी नेक काम, जैसे हज, जिहाद और रिश्ते का हक़ अदा करने आदि के लिए लंबा सफ़र करना।

2- इन्सान का परेशान हाल होना। जैसे उसके बाल बिखरे हुए हों और धूल मिट्टी लगने के कारण उसके शरीर और कपड़े का रंग बदला हुआ हो। यह सब कुछ इस बात का प्रमाण है कि आदमी बहुत परेशान है।

3- दुआ के लिए आकाश की ओर हाथ उठाना।

4- अल्लाह के नामों को वसीला बनाना और गिड़गिड़ाकर दुआ करना। मसनल ऐ मेरे रब ! ऐ मेरे रब! कहना।

दुआ क़बूल होने के इन कारणों के पाए जाने के बावजूद उसकी दुआ क़बूल नहीं होती। क्योंकि उसका खाना हराम का, उसका पीना हराम का, उसका वस्त्र हराम का है और उसका पालन-पोषण हराम भोजन से हुआ है। ऐसे में उसकी दुआ क़बूल हो भी तो हो कैसे?

सीख: “निस्संदेह, अल्लाह पवित्र है और केवल पवित्र चीज़ों को ह…

श्रेणियाँ : दुआओं तथा अज़कार पर आधारित फ़िक़्ह · अक़ीदा · दुआ ग्रहण होने में सहायक चीज़ें तथा उसे ग्रहण न होने देने वाली वस्तुएँ · फ़ज़ीलतें तथा आदाब · सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह पर ईमान · अल्लाह के नामों और गुणों से संबंधित एकेश्वरवाद

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أستغفر الله मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ

إِنَّ ٱللَّهَ وَمَلَٰٓئِكَتَهُۥ يُصَلُّونَ عَلَى ٱلنَّبِىِّ ۚ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ صَلُّوا۟ عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا۟ تَسْلِيمًا

निस्संदेह अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर रहमत भेजते है। ऐ ईमान लानेवालो, तुम भी उसपर रहमत भेजो और ख़ूब सलाम भेजो

Al-Ahzab 33:56

पैग़ंबर पर दुरूद