इस्लाम > Hi > हदीस > फकह तथ उसल ए फकह > मैंने अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अंहुमा) से 'हज्जे तमत्तो' के बारे में पूछा, तो उन…
सह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयعن أبي جَمرة -نصر بن عمران الضُّبَعي- قال: «سألت ابن عباس عن المُتْعَةِ؟ فأمرني بها، وسألته عن الهَدْيِ؟ فقال: فيه جَزُورُ، أو بقرةٌ، أو شَاةٌ، أو شِرْكٌ في دم، قال: وكان ناس كرهوها، فنمت، فرأيت في المنام: كأن إنسانا ينادي: حَجٌّ مَبْرُورٌ، ومُتْعَةٌ مُتَقَبَّلَةٌ. فأتيت ابن عباس فحدثته، فقال: الله أكبر! سُنَّةُ أبي القاسم صلى الله عليه وسلم ».
अबू जमरा ने इब्ने अब्बास (रज़ियल्लाहु अंहुमा) से, उमरे से लेकर हज तक लाभान्वित होने के बारे में पूछा, तो उन्होंने इसकी अनुमति दी। फिर कुरबानी के बारे में पूछा, जो उसीके साथ इस आयत में उल्लिखित हैः "فمن تمتع بالعمرة إلى الحج فما استيسر من الهدي", तो बताया कि उसमें ऊँट, जो सबसे उत्तम है, फिर गाय, फिर बकरी को ज़बह करना है। या फिर ऊँट या गाय का सातवाँ भाग कुरबानी करना है। यानी उस ऊँट या गाय की कुरबानी में शरीक हो सकता है, जिसमें कुल सात आदमी शरीक हों।
लेकिन ऐसा लगा कि किसी ने अबू जमरा के तमत्तो करने पर एतराज़ जताया, तो उन्होंने स्वप्न में देखा कि कोई ग़ैब से उन्हें आवाज़ दे रहा हैः "तेरा हज शरीयत के अनुरूप है और तेरा तमत्तो ग्रहण योग्य है।" फिर क्या था, वे इब्ने अब्बास (रज़्यल्लाहु अंहुमा) के पास आए और उन्हें इस सुंदर स्वप्न की खुशख़बरी दी। चूँकि अच्छा स्वप्न नुबूवत का एक अंग होता है, इसलिए इब्ने अब्बास (रज़ियल्लाहु अंहुमा) इससे प्रसन्न हुए और अपने फ़तवे के सही होने पर खुशी प्रकट करते हुए कहाः अल्लाह बहुत बड़ा है। यह अबुल कासिम (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सुन्नत है।
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