इस्लाम > Hi > हदीस > फकह तथ उसल ए फकह > हमने मर्रुज़ ज़हरान में एक खरगोश का पीछा किया। भी लोग उसके पीछे दौड़े, लेकिन थक गए।
सह़ीह़27 अक्टूबर 2026 को 14h02 बजे अपडेट किया गया
📖 1 मिनट पढ़ने का समयعن أنس رضي الله عنه قال: «أَنْفَجْنَا أَرْنَباً بِمَرِّ الظَّهْرَانِ، فَسَعَى الْقَوْمُ فَلَغَبُوا، وَأَدْرَكْتُهَا فَأَخَذْتُهَا، فَأَتَيْتُ بِهَا أَبَا طَلْحَةَ، فَذَبَحَهَا وَبَعَثَ إلَى رَسُولِ الله صلى الله عليه وسلم بِوَرِكِهَا وَفَخِذَيْهَا فَقَبِلَهُ».
नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- और आपके सहाबा एक यात्रा में थे। इस दौरान शायद मर्रुज़ ज़हरान नामी एक स्थान में रुके। यह वही स्थान है, जहाँ अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अपने साथियों के साथ मक्का विजय के साल रुके थे। इसी बीच उन्होंने एक खरगोश का पीछा किया। बड़ी संख्या में लोग उसके पीछे दौड़े, लेकिन थक हारकर वापस हो गए। अनस बिन मालिक -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो-, जिन्होंने उन दिनों यौवन की दहलीज़ में क़दम रखा ही था, ने उसे पकड़ लिया और अपनी माता के पति अबू तलहा -अल्लाह उनसे प्रसन्नन हो- के पास ले गए। चुनांचे, उन्होंने उसे ज़बह करके अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को दोनों रान तथा कूल्हा भेजा, तो आपने उसे स्वीकर कर लिया और शायद खाया भी।
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