क़ुरआन का पृष्ठ 604 पढ़ें

मुसहफ़ का पृष्ठ 604 15 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 30, हिज़्ब 60 में है।

05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में पृष्ठ 604

15
आयतें
30
जुज़
60
हिज़्ब
3
सूरह
الإخلاص · जुज़ 30
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हिफ़्ज़
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जुज़ 30
पृष्ठ 604
سورة الإخلاص
जुज़ 30 97.3% (549/564)
हिज़्ब 60 94.8% (273/288)

قُلْ هُوَ ٱللَّهُ أَحَدٌ ﴿1﴾

(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ख़ुदा एक है

ٱللَّهُ ٱلصَّمَدُ ﴿2﴾

ख़ुदा बरहक़ बेनियाज़ है

لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ ﴿3﴾

न उसने किसी को जना न उसको किसी ने जना,

وَلَمْ يَكُن لَّهُۥ كُفُوًا أَحَدٌۢ ﴿4﴾

और उसका कोई हमसर नहीं

قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلْفَلَقِ ﴿1﴾

(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं सुबह के मालिक की

مِن شَرِّ مَا خَلَقَ ﴿2﴾

हर चीज़ की बुराई से जो उसने पैदा की पनाह माँगता हूँ

وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ ﴿3﴾

और अंधेरीरात की बुराई से जब उसका अंधेरा छा जाए

وَمِن شَرِّ ٱلنَّفَّـٰثَـٰتِ فِى ٱلْعُقَدِ ﴿4﴾

और गन्डों पर फूँकने वालियों की बुराई से

وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ ﴿5﴾

(जब फूँके) और हसद करने वाले की बुराई से

قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلنَّاسِ ﴿1﴾

(ऐ रसूल) तुम कह दो मैं लोगों के परवरदिगार

مَلِكِ ٱلنَّاسِ ﴿2﴾

लोगों के बादशाह

إِلَـٰهِ ٱلنَّاسِ ﴿3﴾

लोगों के माबूद की (शैतानी)

مِن شَرِّ ٱلْوَسْوَاسِ ٱلْخَنَّاسِ ﴿4﴾

वसवसे की बुराई से पनाह माँगता हूँ

ٱلَّذِى يُوَسْوِسُ فِى صُدُورِ ٱلنَّاسِ ﴿5﴾

जो (ख़ुदा के नाम से) पीछे हट जाता है जो लोगों के दिलों में वसवसे डाला करता है

مِنَ ٱلْجِنَّةِ وَٱلنَّاسِ ﴿6﴾

जिन्नात में से ख्वाह आदमियों में से

بسم الله الرحمن الرحيم गुरु 4 रबी अल-सानी
الخميس 4 ربيع الآخر
هلال متزايد बढ़ता हुआ अर्धचंद्र दिन 5.3 / 29.5
रोशनी 29%
9 दिनों में पूर्णिमा
سبحان الله अल्लाह की पवित्रता है