ق · जुज़ 26
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क़ुरआन का पृष्ठ 520 पढ़ें

मुसहफ़ का पृष्ठ 520 16 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 26, हिज़्ब 52 में है।

10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया

Page 520 dans le Coran

16
आयतें
26
जुज़
52
हिज़्ब
2
सूरह
जुज़ 26
पृष्ठ 520
سورة ق
जुज़ 26 79.5% (155/195)
हिज़्ब 52 61.9% (65/105)

وَكَمْ أَهْلَكْنَا قَبْلَهُم مِّن قَرْنٍ هُمْ أَشَدُّ مِنْهُم بَطْشًۭا فَنَقَّبُوا۟ فِى ٱلْبِلَـٰدِ هَلْ مِن مَّحِيصٍ ﴿٣٦﴾

और हमने तो इनसे पहले कितनी उम्मतें हलाक कर डाली जो इनसे क़ूवत में कहीं बढ़ कर थीं तो उन लोगों ने (मौत के ख़ौफ से) तमाम शहरों को छान मारा कि भला कहीं भी भागने का ठिकाना है

إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَذِكْرَىٰ لِمَن كَانَ لَهُۥ قَلْبٌ أَوْ أَلْقَى ٱلسَّمْعَ وَهُوَ شَهِيدٌۭ ﴿٣٧﴾

इसमें शक़ नहीं कि जो शख़्श (आगाह) दिल रखता है या कान लगाकर हुज़ूरे क़ल्ब से सुनता है उसके लिए इसमें (काफ़ी) नसीहत है

وَلَقَدْ خَلَقْنَا ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا فِى سِتَّةِ أَيَّامٍۢ وَمَا مَسَّنَا مِن لُّغُوبٍۢ ﴿٣٨﴾

और हमने ही यक़ीनन सारे आसमान और ज़मीन और जो कुछ उन दोनों के बीच में है छह: दिन में पैदा किए और थकान तो हमको छुकर भी नहीं गयी

فَٱصْبِرْ عَلَىٰ مَا يَقُولُونَ وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ قَبْلَ طُلُوعِ ٱلشَّمْسِ وَقَبْلَ ٱلْغُرُوبِ ﴿٣٩﴾

तो (ऐ रसूल) जो कुछ ये (काफ़िर) लोग किया करते हैं उस पर तुम सब्र करो और आफ़ताब के निकलने से पहले अपने परवरदिगार के हम्द की तस्बीह किया करो

وَمِنَ ٱلَّيْلِ فَسَبِّحْهُ وَأَدْبَـٰرَ ٱلسُّجُودِ ﴿٤٠﴾

और थोड़ी देर रात को भी और नमाज़ के बाद भी उसकी तस्बीह करो

وَٱسْتَمِعْ يَوْمَ يُنَادِ ٱلْمُنَادِ مِن مَّكَانٍۢ قَرِيبٍۢ ﴿٤١﴾

और कान लगा कर सुन रखो कि जिस दिन पुकारने वाला (इसराफ़ील) नज़दीक ही जगह से आवाज़ देगा

يَوْمَ يَسْمَعُونَ ٱلصَّيْحَةَ بِٱلْحَقِّ ۚ ذَٰلِكَ يَوْمُ ٱلْخُرُوجِ ﴿٤٢﴾

(कि उठो) जिस दिन लोग एक सख्त चीख़ को बाख़ूबी सुन लेगें वही दिन (लोगों) के कब्रों से निकलने का होगा

إِنَّا نَحْنُ نُحْىِۦ وَنُمِيتُ وَإِلَيْنَا ٱلْمَصِيرُ ﴿٤٣﴾

बेशक हम ही (लोगों को) ज़िन्दा करते हैं और हम ही मारते हैं

يَوْمَ تَشَقَّقُ ٱلْأَرْضُ عَنْهُمْ سِرَاعًۭا ۚ ذَٰلِكَ حَشْرٌ عَلَيْنَا يَسِيرٌۭ ﴿٤٤﴾

और हमारी ही तरफ फिर कर आना है जिस दिन ज़मीन (उनके ऊपर से) फट जाएगी और ये झट पट निकल खड़े होंगे ये उठाना और जमा करना

نَّحْنُ أَعْلَمُ بِمَا يَقُولُونَ ۖ وَمَآ أَنتَ عَلَيْهِم بِجَبَّارٍۢ ۖ فَذَكِّرْ بِٱلْقُرْءَانِ مَن يَخَافُ وَعِيدِ ﴿٤٥﴾

और हम पर बहुत आसान है (ऐ रसूल) ये लोग जो कुछ कहते हैं हम (उसे) ख़ूब जानते हैं और तुम उन पर जब्र तो देते नहीं हो तो जो हमारे (अज़ाब के) वायदे से डरे उसको तुम क़ुरान के ज़रिए नसीहत करते रहो

وَٱلذَّٰرِيَـٰتِ ذَرْوًۭا ﴿١﴾

उन (हवाओं की क़सम) जो (बादलों को) उड़ा कर तितर बितर कर देती हैं

فَٱلْحَـٰمِلَـٰتِ وِقْرًۭا ﴿٢﴾

फिर (पानी का) बोझ उठाती हैं

فَٱلْجَـٰرِيَـٰتِ يُسْرًۭا ﴿٣﴾

फिर आहिस्ता आहिस्ता चलती हैं

فَٱلْمُقَسِّمَـٰتِ أَمْرًا ﴿٤﴾

फिर एक ज़रूरी चीज़ (बारिश) को तक़सीम करती हैं

إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَصَادِقٌۭ ﴿٥﴾

कि तुम से जो वायदा किया जाता है ज़रूर बिल्कुल सच्चा है

وَإِنَّ ٱلدِّينَ لَوَٰقِعٌۭ ﴿٦﴾

और (आमाल की) जज़ा (सज़ा) ज़रूर होगी

بسم الله الرحمن الرحيم शुक्र 24 मुहर्रम
الجمعة 24 محرّم
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حسبنا الله ونعم الوكيل अल्लाह हमारे लिए काफी है, कितना अच्छा रक्षक है