المعارج · जुज़ 29
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क़ुरआन का पृष्ठ 569 पढ़ें

मुसहफ़ का पृष्ठ 569 29 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 29, हिज़्ब 57 में है।

10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया

Page 569 dans le Coran

29
आयतें
29
जुज़
57
हिज़्ब
1
सूरह

Sourate dans la page 569

जुज़ 29
पृष्ठ 569
سورة المعارج
जुज़ 29 33.4% (144/431)
हिज़्ब 57 69.9% (144/206)

يُبَصَّرُونَهُمْ ۚ يَوَدُّ ٱلْمُجْرِمُ لَوْ يَفْتَدِى مِنْ عَذَابِ يَوْمِئِذٍۭ بِبَنِيهِ ﴿١١﴾

कोई किसी दोस्त को न पूछेगा गुनेहगार तो आरज़ू करेगा कि काश उस दिन के अज़ाब के बदले उसके बेटों

وَصَـٰحِبَتِهِۦ وَأَخِيهِ ﴿١٢﴾

और उसकी बीवी और उसके भाई

وَفَصِيلَتِهِ ٱلَّتِى تُـْٔوِيهِ ﴿١٣﴾

और उसके कुनबे को जिसमें वह रहता था

وَمَن فِى ٱلْأَرْضِ جَمِيعًۭا ثُمَّ يُنجِيهِ ﴿١٤﴾

और जितने आदमी ज़मीन पर हैं सब को ले ले और उसको छुटकारा दे दें

كَلَّآ ۖ إِنَّهَا لَظَىٰ ﴿١٥﴾

(मगर) ये हरगिज़ न होगा

نَزَّاعَةًۭ لِّلشَّوَىٰ ﴿١٦﴾

जहन्नुम की वह भड़कती आग है कि खाल उधेड़ कर रख देगी

تَدْعُوا۟ مَنْ أَدْبَرَ وَتَوَلَّىٰ ﴿١٧﴾

(और) उन लोगों को अपनी तरफ बुलाती होगी

وَجَمَعَ فَأَوْعَىٰٓ ﴿١٨﴾

जिन्होंने (दीन से) पीठ फेरी और मुँह मोड़ा और (माल जमा किया)

۞ إِنَّ ٱلْإِنسَـٰنَ خُلِقَ هَلُوعًا ﴿١٩﴾

और बन्द कर रखा बेशक इन्सान बड़ा लालची पैदा हुआ है

إِذَا مَسَّهُ ٱلشَّرُّ جَزُوعًۭا ﴿٢٠﴾

जब उसे तक़लीफ छू भी गयी तो घबरा गया

وَإِذَا مَسَّهُ ٱلْخَيْرُ مَنُوعًا ﴿٢١﴾

और जब उसे ज़रा फराग़ी हासिल हुई तो बख़ील बन बैठा

إِلَّا ٱلْمُصَلِّينَ ﴿٢٢﴾

मगर जो लोग नमाज़ पढ़ते हैं

ٱلَّذِينَ هُمْ عَلَىٰ صَلَاتِهِمْ دَآئِمُونَ ﴿٢٣﴾

जो अपनी नमाज़ का इल्तज़ाम रखते हैं

وَٱلَّذِينَ فِىٓ أَمْوَٰلِهِمْ حَقٌّۭ مَّعْلُومٌۭ ﴿٢٤﴾

और जिनके माल में माँगने वाले और न माँगने वाले के

لِّلسَّآئِلِ وَٱلْمَحْرُومِ ﴿٢٥﴾

लिए एक मुक़र्रर हिस्सा है

وَٱلَّذِينَ يُصَدِّقُونَ بِيَوْمِ ٱلدِّينِ ﴿٢٦﴾

और जो लोग रोज़े जज़ा की तस्दीक़ करते हैं

وَٱلَّذِينَ هُم مِّنْ عَذَابِ رَبِّهِم مُّشْفِقُونَ ﴿٢٧﴾

और जो लोग अपने परवरदिगार के अज़ाब से डरते रहते हैं

إِنَّ عَذَابَ رَبِّهِمْ غَيْرُ مَأْمُونٍۢ ﴿٢٨﴾

बेशक उनको परवरदिगार के अज़ाब से बेख़ौफ न होना चाहिए

وَٱلَّذِينَ هُمْ لِفُرُوجِهِمْ حَـٰفِظُونَ ﴿٢٩﴾

और जो लोग अपनी शर्मगाहों को अपनी बीवियों और अपनी लौन्डियों के सिवा से हिफाज़त करते हैं

إِلَّا عَلَىٰٓ أَزْوَٰجِهِمْ أَوْ مَا مَلَكَتْ أَيْمَـٰنُهُمْ فَإِنَّهُمْ غَيْرُ مَلُومِينَ ﴿٣٠﴾

तो इन लोगों की हरगिज़ मलामत न की जाएगी

فَمَنِ ٱبْتَغَىٰ وَرَآءَ ذَٰلِكَ فَأُو۟لَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْعَادُونَ ﴿٣١﴾

तो जो लोग उनके सिवा और के ख़ास्तगार हों तो यही लोग हद से बढ़ जाने वाले हैं

وَٱلَّذِينَ هُمْ لِأَمَـٰنَـٰتِهِمْ وَعَهْدِهِمْ رَٰعُونَ ﴿٣٢﴾

और जो लोग अपनी अमानतों और अहदों का लेहाज़ रखते हैं

وَٱلَّذِينَ هُم بِشَهَـٰدَٰتِهِمْ قَآئِمُونَ ﴿٣٣﴾

और जो लोग अपनी यहादतों पर क़ायम रहते हैं

وَٱلَّذِينَ هُمْ عَلَىٰ صَلَاتِهِمْ يُحَافِظُونَ ﴿٣٤﴾

और जो लोग अपनी नमाज़ो का ख्याल रखते हैं

أُو۟لَـٰٓئِكَ فِى جَنَّـٰتٍۢ مُّكْرَمُونَ ﴿٣٥﴾

यही लोग बेहिश्त के बाग़ों में इज्ज़त से रहेंगे

فَمَالِ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ قِبَلَكَ مُهْطِعِينَ ﴿٣٦﴾

तो (ऐ रसूल) काफिरों को क्या हो गया है

عَنِ ٱلْيَمِينِ وَعَنِ ٱلشِّمَالِ عِزِينَ ﴿٣٧﴾

कि तुम्हारे पास गिरोह गिरोह दाहिने से बाएँ से दौड़े चले आ रहे हैं

أَيَطْمَعُ كُلُّ ٱمْرِئٍۢ مِّنْهُمْ أَن يُدْخَلَ جَنَّةَ نَعِيمٍۢ ﴿٣٨﴾

क्या इनमें से हर शख़्श इस का मुतमइनी है कि चैन के बाग़ (बेहिश्त) में दाख़िल होगा

كَلَّآ ۖ إِنَّا خَلَقْنَـٰهُم مِّمَّا يَعْلَمُونَ ﴿٣٩﴾

हरगिज़ नहीं हमने उनको जिस (गन्दी) चीज़ से पैदा किया ये लोग जानते हैं

بسم الله الرحمن الرحيم शुक्र 24 मुहर्रम
الجمعة 24 محرّم
هلال متناقص घटता हुआ अर्धचंद्र दिन 25.1 / 29.5
रोशनी 21%
4 दिनों में अमावस्या
أستغفر الله मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ