النبإ · जुज़ 30
पर जाएँ
बुकमार्क
कारी / पाठक
चलाने की गति
आयत दोहराना
दोहराएँ
स्वतः स्क्रॉल
अनुवाद
अरबी फ़ॉन्ट
टेक्स्ट आकार
अरबी
अनुवाद
हिफ़्ज़ का क्षेत्र
दोहराव
प्रति आयत
पूर्ण लूप
मुख्य कारी
जारी है - A-B लूप /

क़ुरआन का पृष्ठ 583 पढ़ें

मुसहफ़ का पृष्ठ 583 25 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 30, हिज़्ब 59 में है।

10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया

Page 583 dans le Coran

25
आयतें
30
जुज़
59
हिज़्ब
2
सूरह
जुज़ 30
पृष्ठ 583
سورة النبإ
जुज़ 30 5.3% (30/564)
हिज़्ब 59 10.9% (30/276)

إِنَّ لِلْمُتَّقِينَ مَفَازًا ﴿٣١﴾

बेशक परहेज़गारों के लिए बड़ी कामयाबी है

حَدَآئِقَ وَأَعْنَـٰبًۭا ﴿٣٢﴾

(यानि बेहश्त के) बाग़ और अंगूर

وَكَوَاعِبَ أَتْرَابًۭا ﴿٣٣﴾

और वह औरतें जिनकी उठती हुई जवानियाँ

وَكَأْسًۭا دِهَاقًۭا ﴿٣٤﴾

और बाहम हमजोलियाँ हैं और शराब के लबरेज़ साग़र

لَّا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْوًۭا وَلَا كِذَّٰبًۭا ﴿٣٥﴾

और शराब के लबरेज़ साग़र वहाँ न बेहूदा बात सुनेंगे और न झूठ

جَزَآءًۭ مِّن رَّبِّكَ عَطَآءً حِسَابًۭا ﴿٣٦﴾

(ये) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से काफ़ी इनाम और सिला है

رَّبِّ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ٱلرَّحْمَـٰنِ ۖ لَا يَمْلِكُونَ مِنْهُ خِطَابًۭا ﴿٣٧﴾

जो सारे आसमान और ज़मीन और जो इन दोनों के बीच में है सबका मालिक है बड़ा मेहरबान लोगों को उससे बात का पूरा न होगा

يَوْمَ يَقُومُ ٱلرُّوحُ وَٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ صَفًّۭا ۖ لَّا يَتَكَلَّمُونَ إِلَّا مَنْ أَذِنَ لَهُ ٱلرَّحْمَـٰنُ وَقَالَ صَوَابًۭا ﴿٣٨﴾

जिस दिन जिबरील और फरिश्ते (उसके सामने) पर बाँध कर खड़े होंगे (उस दिन) उससे कोई बात न कर सकेगा मगर जिसे ख़ुदा इजाज़त दे और वह ठिकाने की बात कहे

ذَٰلِكَ ٱلْيَوْمُ ٱلْحَقُّ ۖ فَمَن شَآءَ ٱتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِۦ مَـَٔابًا ﴿٣٩﴾

वह दिन बरहक़ है तो जो शख़्श चाहे अपने परवरदिगार की बारगाह में (अपना) ठिकाना बनाए

إِنَّآ أَنذَرْنَـٰكُمْ عَذَابًۭا قَرِيبًۭا يَوْمَ يَنظُرُ ٱلْمَرْءُ مَا قَدَّمَتْ يَدَاهُ وَيَقُولُ ٱلْكَافِرُ يَـٰلَيْتَنِى كُنتُ تُرَٰبًۢا ﴿٤٠﴾

हमने तुम लोगों को अनक़रीब आने वाले अज़ाब से डरा दिया जिस दिन आदमी अपने हाथों पहले से भेजे हुए (आमाल) को देखेगा और काफ़िर कहेगा काश मैं ख़ाक हो जाता

وَٱلنَّـٰزِعَـٰتِ غَرْقًۭا ﴿١﴾

उन (फ़रिश्तों) की क़सम

وَٱلنَّـٰشِطَـٰتِ نَشْطًۭا ﴿٢﴾

जो (कुफ्फ़ार की रूह) डूब कर सख्ती से खींच लेते हैं

وَٱلسَّـٰبِحَـٰتِ سَبْحًۭا ﴿٣﴾

और उनकी क़सम जो (मोमिनीन की जान) आसानी से खोल देते हैं

فَٱلسَّـٰبِقَـٰتِ سَبْقًۭا ﴿٤﴾

और उनकी क़सम जो (आसमान ज़मीन के दरमियान) पैरते फिरते हैं

فَٱلْمُدَبِّرَٰتِ أَمْرًۭا ﴿٥﴾

फिर एक के आगे बढ़ते हैं

يَوْمَ تَرْجُفُ ٱلرَّاجِفَةُ ﴿٦﴾

फिर (दुनिया के) इन्तज़ाम करते हैं (उनकी क़सम) कि क़यामत हो कर रहेगी

تَتْبَعُهَا ٱلرَّادِفَةُ ﴿٧﴾

जिस दिन ज़मीन को भूचाल आएगा फिर उसके पीछे और ज़लज़ला आएगा

قُلُوبٌۭ يَوْمَئِذٍۢ وَاجِفَةٌ ﴿٨﴾

उस दिन दिलों को धड़कन होगी

أَبْصَـٰرُهَا خَـٰشِعَةٌۭ ﴿٩﴾

उनकी ऑंखें (निदामत से) झुकी हुई होंगी

يَقُولُونَ أَءِنَّا لَمَرْدُودُونَ فِى ٱلْحَافِرَةِ ﴿١٠﴾

कुफ्फ़ार कहते हैं कि क्या हम उलटे पाँव (ज़िन्दगी की तरफ़) फिर लौटेंगे

أَءِذَا كُنَّا عِظَـٰمًۭا نَّخِرَةًۭ ﴿١١﴾

क्या जब हम खोखल हड्डियाँ हो जाएँगे

قَالُوا۟ تِلْكَ إِذًۭا كَرَّةٌ خَاسِرَةٌۭ ﴿١٢﴾

कहते हैं कि ये लौटना तो बड़ा नुक़सान देह है

فَإِنَّمَا هِىَ زَجْرَةٌۭ وَٰحِدَةٌۭ ﴿١٣﴾

वह (क़यामत) तो (गोया) बस एक सख्त चीख़ होगी

فَإِذَا هُم بِٱلسَّاهِرَةِ ﴿١٤﴾

और लोग शक़ बारगी एक मैदान (हश्र) में मौजूद होंगे

هَلْ أَتَىٰكَ حَدِيثُ مُوسَىٰٓ ﴿١٥﴾

(ऐ रसूल) क्या तुम्हारे पास मूसा का किस्सा भी पहुँचा है

بسم الله الرحمن الرحيم शुक्र 24 मुहर्रम
الجمعة 24 محرّم
هلال متناقص घटता हुआ अर्धचंद्र दिन 25.1 / 29.5
रोशनी 21%
4 दिनों में अमावस्या
الله أكبر अल्लाह सबसे महान है