मुसहफ़ का पृष्ठ 595 29 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 30, हिज़्ब 60 में है।
10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया
coran.read_full_page : क़ुरआन का पृष्ठ 595 पढ़ें →
وَٱلشَّمْسِ وَضُحَىٰهَا ﴿١﴾
सूरज की क़सम और उसकी रौशनी की
وَٱلْقَمَرِ إِذَا تَلَىٰهَا ﴿٢﴾
और चाँद की जब उसके पीछे निकले
وَٱلنَّهَارِ إِذَا جَلَّىٰهَا ﴿٣﴾
और दिन की जब उसे चमका दे
وَٱلَّيْلِ إِذَا يَغْشَىٰهَا ﴿٤﴾
और रात की जब उसे ढाँक ले
وَٱلسَّمَآءِ وَمَا بَنَىٰهَا ﴿٥﴾
और आसमान की और जिसने उसे बनाया
وَٱلْأَرْضِ وَمَا طَحَىٰهَا ﴿٦﴾
और ज़मीन की जिसने उसे बिछाया
وَنَفْسٍۢ وَمَا سَوَّىٰهَا ﴿٧﴾
और जान की और जिसने उसे दुरूस्त किया
فَأَلْهَمَهَا فُجُورَهَا وَتَقْوَىٰهَا ﴿٨﴾
फिर उसकी बदकारी और परहेज़गारी को उसे समझा दिया
قَدْ أَفْلَحَ مَن زَكَّىٰهَا ﴿٩﴾
(क़सम है) जिसने उस (जान) को (गनाह से) पाक रखा वह तो कामयाब हुआ
وَقَدْ خَابَ مَن دَسَّىٰهَا ﴿١٠﴾
और जिसने उसे (गुनाह करके) दबा दिया वह नामुराद रहा
كَذَّبَتْ ثَمُودُ بِطَغْوَىٰهَآ ﴿١١﴾
क़ौम मसूद ने अपनी सरकशी से (सालेह पैग़म्बर को) झुठलाया,
إِذِ ٱنۢبَعَثَ أَشْقَىٰهَا ﴿١٢﴾
जब उनमें का एक बड़ा बदबख्त उठ खड़ा हुआ
فَقَالَ لَهُمْ رَسُولُ ٱللَّهِ نَاقَةَ ٱللَّهِ وَسُقْيَـٰهَا ﴿١٣﴾
तो ख़ुदा के रसूल (सालेह) ने उनसे कहा कि ख़ुदा की ऊँटनी और उसके पानी पीने से तअर्रुज़ न करना
فَكَذَّبُوهُ فَعَقَرُوهَا فَدَمْدَمَ عَلَيْهِمْ رَبُّهُم بِذَنۢبِهِمْ فَسَوَّىٰهَا ﴿١٤﴾
मगर उन लोगों पैग़म्बर को झुठलाया और उसकी कूँचे काट डाली तो ख़ुदा ने उनके गुनाहों सबब से उन पर अज़ाब नाज़िल किया फिर (हलाक करके) बराबर कर दिया
وَلَا يَخَافُ عُقْبَـٰهَا ﴿١٥﴾
और उसको उनके बदले का कोई ख़ौफ तो है नहीं
وَٱلَّيْلِ إِذَا يَغْشَىٰ ﴿١﴾
रात की क़सम जब (सूरज को) छिपा ले
وَٱلنَّهَارِ إِذَا تَجَلَّىٰ ﴿٢﴾
और दिन की क़सम जब ख़ूब रौशन हो
وَمَا خَلَقَ ٱلذَّكَرَ وَٱلْأُنثَىٰٓ ﴿٣﴾
और उस (ज़ात) की जिसने नर व मादा को पैदा किया
إِنَّ سَعْيَكُمْ لَشَتَّىٰ ﴿٤﴾
कि बेशक तुम्हारी कोशिश तरह तरह की है
فَأَمَّا مَنْ أَعْطَىٰ وَٱتَّقَىٰ ﴿٥﴾
तो जिसने सख़ावत की और अच्छी बात (इस्लाम) की तस्दीक़ की
وَصَدَّقَ بِٱلْحُسْنَىٰ ﴿٦﴾
तो हम उसके लिए राहत व आसानी
فَسَنُيَسِّرُهُۥ لِلْيُسْرَىٰ ﴿٧﴾
(जन्नत) के असबाब मुहय्या कर देंगे
وَأَمَّا مَنۢ بَخِلَ وَٱسْتَغْنَىٰ ﴿٨﴾
और जिसने बुख्ल किया, और बेपरवाई की
وَكَذَّبَ بِٱلْحُسْنَىٰ ﴿٩﴾
और अच्छी बात को झुठलाया
فَسَنُيَسِّرُهُۥ لِلْعُسْرَىٰ ﴿١٠﴾
तो हम उसे सख्ती (जहन्नुम) में पहुँचा देंगे,
وَمَا يُغْنِى عَنْهُ مَالُهُۥٓ إِذَا تَرَدَّىٰٓ ﴿١١﴾
और जब वह हलाक होगा तो उसका माल उसके कुछ भी काम न आएगा
إِنَّ عَلَيْنَا لَلْهُدَىٰ ﴿١٢﴾
हमें राह दिखा देना ज़रूर है
وَإِنَّ لَنَا لَلْـَٔاخِرَةَ وَٱلْأُولَىٰ ﴿١٣﴾
और आख़ेरत और दुनिया (दोनों) ख़ास हमारी चीज़े हैं
فَأَنذَرْتُكُمْ نَارًۭا تَلَظَّىٰ ﴿١٤﴾
तो हमने तुम्हें भड़कती हुई आग से डरा दिया