रुकू 512 सूरह Al-Qiyama (आयत 1 से 30) से है। इसमें 30 आयतें हैं और यह जुज़ 29 में है।
10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया
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كَلَّا بَلْ تُحِبُّونَ ٱلْعَاجِلَةَ ﴿٢٠﴾
मगर (लोगों) हक़ तो ये है कि तुम लोग दुनिया को दोस्त रखते हो
وَتَذَرُونَ ٱلْـَٔاخِرَةَ ﴿٢١﴾
और आख़ेरत को छोड़े बैठे हो
وُجُوهٌۭ يَوْمَئِذٍۢ نَّاضِرَةٌ ﴿٢٢﴾
उस रोज़ बहुत से चेहरे तो तरो ताज़ा बशबाब होंगे
إِلَىٰ رَبِّهَا نَاظِرَةٌۭ ﴿٢٣﴾
(और) अपने परवरदिगार (की नेअमत) को देख रहे होंगे
وَوُجُوهٌۭ يَوْمَئِذٍۭ بَاسِرَةٌۭ ﴿٢٤﴾
और बहुतेरे मुँह उस दिन उदास होंगे
تَظُنُّ أَن يُفْعَلَ بِهَا فَاقِرَةٌۭ ﴿٢٥﴾
समझ रहें हैं कि उन पर मुसीबत पड़ने वाली है कि कमर तोड़ देगी
كَلَّآ إِذَا بَلَغَتِ ٱلتَّرَاقِىَ ﴿٢٦﴾
सुन लो जब जान (बदन से खिंच के) हँसली तक आ पहुँचेगी
وَقِيلَ مَنْ ۜ رَاقٍۢ ﴿٢٧﴾
और कहा जाएगा कि (इस वक्त) क़ोई झाड़ फूँक करने वाला है
وَظَنَّ أَنَّهُ ٱلْفِرَاقُ ﴿٢٨﴾
और मरने वाले ने समझा कि अब (सबसे) जुदाई है
وَٱلْتَفَّتِ ٱلسَّاقُ بِٱلسَّاقِ ﴿٢٩﴾
और (मौत की तकलीफ़ से) पिन्डली से पिन्डली लिपट जाएगी
إِلَىٰ رَبِّكَ يَوْمَئِذٍ ٱلْمَسَاقُ ﴿٣٠﴾
उस दिन तुमको अपने परवरदिगार की बारगाह में चलना है