القدر · जुज़ 30
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क़ुरआन का रुकू 539 पढ़ें

रुकू 539 सूरह Al-Qadr (आयत 1 से 5) से है। इसमें 5 आयतें हैं और यह जुज़ 30 में है।

10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया

Ruku 539 dans le Coran

5
आयतें
1
सूरह
30
जुज़
v.1 – v.5
आयतें

Sourate dans le Ruku 539

पृष्ठ 598
रुकू 539
سورة القدر
जुज़ 30 80.3% (453/564)
हिज़्ब 60 61.5% (177/288)

إِنَّآ أَنزَلْنَـٰهُ فِى لَيْلَةِ ٱلْقَدْرِ ﴿١﴾

हमने (इस कुरान) को शबे क़द्र में नाज़िल (करना शुरू) किया

وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا لَيْلَةُ ٱلْقَدْرِ ﴿٢﴾

और तुमको क्या मालूम शबे क़द्र क्या है

لَيْلَةُ ٱلْقَدْرِ خَيْرٌۭ مِّنْ أَلْفِ شَهْرٍۢ ﴿٣﴾

शबे क़द्र (मरतबा और अमल में) हज़ार महीनो से बेहतर है

تَنَزَّلُ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ وَٱلرُّوحُ فِيهَا بِإِذْنِ رَبِّهِم مِّن كُلِّ أَمْرٍۢ ﴿٤﴾

इस (रात) में फ़रिश्ते और जिबरील (साल भर की) हर बात का हुक्म लेकर अपने परवरदिगार के हुक्म से नाज़िल होते हैं

سَلَـٰمٌ هِىَ حَتَّىٰ مَطْلَعِ ٱلْفَجْرِ ﴿٥﴾

ये रात सुबह के तुलूअ होने तक (अज़सरतापा) सलामती है

بسم الله الرحمن الرحيم शुक्र 1 सफर
الجمعة 1 صفر
هلال متزايد बढ़ता हुआ अर्धचंद्र दिन 2.4 / 29.5
रोशनी 6%
12 दिनों में पूर्णिमा
أستغفر الله मैं अल्लाह से माफी माँगता हूँ