الناس · जुज़ 30
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क़ुरआन का रुकू 556 पढ़ें

रुकू 556 सूरह An-Nas (आयत 1 से 6) से है। इसमें 6 आयतें हैं और यह जुज़ 30 में है।

10 जुलाई 2026 को 03h52 बजे अपडेट किया गया

Ruku 556 dans le Coran

6
आयतें
1
सूरह
30
जुज़
v.1 – v.6
आयतें

Sourate dans le Ruku 556

पृष्ठ 604
रुकू 556
سورة الإخلاص
जुज़ 30 98.9% (558/564)
हिज़्ब 60 97.9% (282/288)

قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلنَّاسِ ﴿١﴾

(ऐ रसूल) तुम कह दो मैं लोगों के परवरदिगार

مَلِكِ ٱلنَّاسِ ﴿٢﴾

लोगों के बादशाह

إِلَـٰهِ ٱلنَّاسِ ﴿٣﴾

लोगों के माबूद की (शैतानी)

مِن شَرِّ ٱلْوَسْوَاسِ ٱلْخَنَّاسِ ﴿٤﴾

वसवसे की बुराई से पनाह माँगता हूँ

ٱلَّذِى يُوَسْوِسُ فِى صُدُورِ ٱلنَّاسِ ﴿٥﴾

जो (ख़ुदा के नाम से) पीछे हट जाता है जो लोगों के दिलों में वसवसे डाला करता है

مِنَ ٱلْجِنَّةِ وَٱلنَّاسِ ﴿٦﴾

जिन्नात में से ख्वाह आदमियों में से

بسم الله الرحمن الرحيم गुरु 30 मुहर्रम
الخميس 30 محرّم
هلال متزايد बढ़ता हुआ अर्धचंद्र दिन 2 / 29.5
रोशनी 5%
13 दिनों में पूर्णिमा
سبحان الله अल्लाह की पवित्रता है