क़ुरआन का पृष्ठ 447 पढ़ें

मुसहफ़ का पृष्ठ 447 27 आयतों को समाहित करता है। यह जुज़ 23, हिज़्ब 45 में है।

05 अगस्त 2026 को 16h34 बजे अपडेट किया गया

क़ुरआन में पृष्ठ 447

27
आयतें
23
जुज़
45
हिज़्ब
1
सूरह

पृष्ठ 447 में सूरह

الصافات · जुज़ 23
जुज़ 23
पृष्ठ 447
سورة الصافات
जुज़ 23 22.4% (80/357)
हिज़्ब 45 40.0% (80/200)

مَا لَكُمْ لَا تَنَاصَرُونَ ﴿٢٥﴾

(अरे कमबख्तों) अब तुम्हें क्या होगा कि एक दूसरे की मदद नहीं करते

بَلْ هُمُ ٱلْيَوْمَ مُسْتَسْلِمُونَ ﴿٢٦﴾

(जवाब क्या देंगे) बल्कि वह तो आज गर्दन झुकाए हुए हैं

وَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍۢ يَتَسَآءَلُونَ ﴿٢٧﴾

और एक दूसरे की तरफ मुतावज्जे होकर बाहम पूछताछ करेंगे

قَالُوٓا۟ إِنَّكُمْ كُنتُمْ تَأْتُونَنَا عَنِ ٱلْيَمِينِ ﴿٢٨﴾

(और इन्सान शयातीन से) कहेंगे कि तुम ही तो हमारी दाहिनी तरफ से (हमें बहकाने को) चढ़ आते थे

قَالُوا۟ بَل لَّمْ تَكُونُوا۟ مُؤْمِنِينَ ﴿٢٩﴾

वह जवाब देगें (हम क्या जानें) तुम तो खुद ईमान लाने वाले न थे

وَمَا كَانَ لَنَا عَلَيْكُم مِّن سُلْطَـٰنٍۭ ۖ بَلْ كُنتُمْ قَوْمًۭا طَـٰغِينَ ﴿٣٠﴾

और (साफ़ तो ये है कि) हमारी तुम पर कुछ हुकूमत तो थी नहीं बल्कि तुम खुद सरकश लोग थे

فَحَقَّ عَلَيْنَا قَوْلُ رَبِّنَآ ۖ إِنَّا لَذَآئِقُونَ ﴿٣١﴾

फिर अब तो लोगों पर हमारे परवरदिगार का (अज़ाब का) क़ौल पूरा हो गया कि अब हम सब यक़ीनन अज़ाब का मज़ा चखेंगे

فَأَغْوَيْنَـٰكُمْ إِنَّا كُنَّا غَـٰوِينَ ﴿٣٢﴾

हम खुद गुमराह थे तो तुम को भी गुमराह किया

فَإِنَّهُمْ يَوْمَئِذٍۢ فِى ٱلْعَذَابِ مُشْتَرِكُونَ ﴿٣٣﴾

ग़रज़ ये लोग सब के सब उस दिन अज़ाब में शरीक होगें

إِنَّا كَذَٰلِكَ نَفْعَلُ بِٱلْمُجْرِمِينَ ﴿٣٤﴾

और हम तो गुनाहगारों के साथ यूँ ही किया करते हैं ये लोग ऐसे (शरीर) थे

إِنَّهُمْ كَانُوٓا۟ إِذَا قِيلَ لَهُمْ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا ٱللَّهُ يَسْتَكْبِرُونَ ﴿٣٥﴾

कि जब उनसे कहा जाता था कि खुदा के सिवा कोई माबूद नहीं तो अकड़ा करते थे

وَيَقُولُونَ أَئِنَّا لَتَارِكُوٓا۟ ءَالِهَتِنَا لِشَاعِرٍۢ مَّجْنُونٍۭ ﴿٣٦﴾

और ये लोग कहते थे कि क्या एक पागल शायर के लिए हम अपने माबूदों को छोड़ बैठें (अरे कम्बख्तों ये शायर या पागल नहीं)

بَلْ جَآءَ بِٱلْحَقِّ وَصَدَّقَ ٱلْمُرْسَلِينَ ﴿٣٧﴾

बल्कि ये तो हक़ बात लेकर आया है और (अगले) पैग़म्बरों की तसदीक़ करता है

إِنَّكُمْ لَذَآئِقُوا۟ ٱلْعَذَابِ ٱلْأَلِيمِ ﴿٣٨﴾

तुम लोग (अगर न मानोगे) तो ज़रूर दर्दनाक अज़ाब का मज़ा चखोगे

وَمَا تُجْزَوْنَ إِلَّا مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ ﴿٣٩﴾

और तुम्हें तो उसके किये का बदला दिया जाएगा जो (जो दुनिया में) करते रहे

إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ ﴿٤٠﴾

मगर खुदा के बरगुजीदा बन्दे

أُو۟لَـٰٓئِكَ لَهُمْ رِزْقٌۭ مَّعْلُومٌۭ ﴿٤١﴾

उनके वास्ते (बेहिश्त में) एक मुक़र्रर रोज़ी होगी

فَوَٰكِهُ ۖ وَهُم مُّكْرَمُونَ ﴿٤٢﴾

(और वह भी ऐसी वैसी नहीं) हर क़िस्म के मेवे

فِى جَنَّـٰتِ ٱلنَّعِيمِ ﴿٤٣﴾

और वह लोग बड़ी इज्ज़त से नेअमत के (लदे हुए)

عَلَىٰ سُرُرٍۢ مُّتَقَـٰبِلِينَ ﴿٤٤﴾

बाग़ों में तख्तों पर (चैन से) आमने सामने बैठे होगे

يُطَافُ عَلَيْهِم بِكَأْسٍۢ مِّن مَّعِينٍۭ ﴿٤٥﴾

उनमें साफ सफेद बुर्राक़ शराब के जाम का दौर चल रहा होगा

بَيْضَآءَ لَذَّةٍۢ لِّلشَّـٰرِبِينَ ﴿٤٦﴾

जो पीने वालों को बड़ा मज़ा देगी

لَا فِيهَا غَوْلٌۭ وَلَا هُمْ عَنْهَا يُنزَفُونَ ﴿٤٧﴾

(और फिर) न उस शराब में ख़ुमार की वजह से) दर्द सर होगा और न वह उस (के पीने) से मतवाले होंगे

وَعِندَهُمْ قَـٰصِرَٰتُ ٱلطَّرْفِ عِينٌۭ ﴿٤٨﴾

और उनके पहलू में (शर्म से) नीची निगाहें करने वाली बड़ी बड़ी ऑंखों वाली परियाँ होगी

كَأَنَّهُنَّ بَيْضٌۭ مَّكْنُونٌۭ ﴿٤٩﴾

(उनकी) गोरी-गोरी रंगतों में हल्की सी सुर्ख़ी ऐसी झलकती होगी

فَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍۢ يَتَسَآءَلُونَ ﴿٥٠﴾

गोया वह अन्डे हैं जो छिपाए हुए रखे हो

قَالَ قَآئِلٌۭ مِّنْهُمْ إِنِّى كَانَ لِى قَرِينٌۭ ﴿٥١﴾

फिर एक दूसरे की तरफ मुतावज्जे पाकर बाहम बातचीत करते करते उनमें से एक कहने वाला बोल उठेगा कि (दुनिया में) मेरा एक दोस्त था

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